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MP News: शहर में शामिल हुए ‘151 गांव’, विवादों में फंसे 70 हजार खसरे

MP News: खसरों के आधार पर राजस्व न्यायालयों में मामले दर्ज हो रहे हैं। रिटायर्ड एडीएम वीके चतुर्वेदी के अनुसार 2011 में लैंड रिकॉर्ड को डिजिटाइज किया तो उसके बाद स्थिति बिगड़ी।

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Land Parcels

Land Parcels प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- freepik)

MP News: मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में अफसरों की एक गलती ने शहर को जमीन विवाद का गढ़ बना दिया। हर दूसरे प्लॉट पर सीमा विवाद है। शहरी सीमा या यूं कहें कि कॉलोनी की जमीन-घर प्लॉट नंबर से रिकॉर्ड में दर्ज होने थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। 151 गांवों को शहर से जोड़ा और इनका प्रबंधन लैंड रिकॉर्ड में आज भी खसरों के आधार पर ही है। अब खसरों के आधार पर राजस्व न्यायालयों में मामले दर्ज हो रहे हैं। करीब 70 हजार खसरों पर विवाद है। ये कुल खसरों का 50 फीसदी है।

ऐसे समझें स्थिति

कोलार में राजहर्ष कॉलोनी के आठ सेक्टर बनाए गए। ये तीन गांवों की जमीन पर है। 2014 में कोलार नगर पालिका के साथ भोपाल में शामिल हो गए, लेकिन यहां के जमीनों की पहचान व रिकॉर्ड खसरों से रही। अब हर दूसरे-तीसरे प्लॉट पर विवाद है। इस समय यहां 12 हजार प्लॉट पर विवाद की स्थिति है। इससे आमजन परेशान है और सरकारी अफसर-कर्मचारी इसे कमाई के मौके की तरह भुना रहे हैं।

ऐसे दुरस्त करें विवाद

रिटायर्ड एडीएम वीके चतुर्वेदी के अनुसार 2011 में लैंड रिकॉर्ड को डिजिटाइज किया तो उसके बाद स्थिति बिगड़ी। चतुर्वेदी के अनुसार जब ग्रामीण क्षेत्र शहरी सीमा में लिया गया, तभी उसकी जमीन को ब्लॉक व प्लॉट में बांटना था। इससे विवाद नहीं बनता। ऐसा करने से अफसर बचते रहे और अब जमीन विवाद ने बड़ा रूप ले लिया। अब जिले के अफसरों को जियो मैपिंग से बनाए डिजिटल रिकॉर्ड की पुराने नक्शों से फिजिकल वेरिफिकेशन करना चाहिए। अरेरा कॉलोनी की तरह अविवादित व व्यवस्थित कॉलोनी का आदर्श लेकर ब्लॉक व प्लॉट तय करना चाहिए, इससे मौजूदा विवाद खत्म होंगे।

लैंड रिकॉर्ड गड़बड़ी व खसरों की मिस मैचिंग की शिकायतें आ रही है। ये काम बड़े स्तर पर किया गया था। अभी तो राजस्व अफसरों को हर शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निराकृत करने का कहा है। - प्रियंक मिश्रा, कलेक्टर

जान लें क्या होता है खसरा

जानकारी के लिए बता दें कि खसरा एक फारसी शब्द है, जिसे 'गाटा संख्या'भी कहते हैं। यह भारत के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में जमीन के एक विशिष्ट टुकड़े (प्लॉट) को राजस्व विभाग द्वारा दिया गया एक अद्वितीय नंबर है। इसमें खेत-प्लॉट का क्षेत्रफल, मालिक का नाम, उस पर उगाई जाने वाली फसल, मिट्टी का प्रकार और सिंचाई के स्रोत का ब्यौरा होता है। यह जमीन की पहचान का मुख्य सबूत है और जमीन के सौदे (खरीद-बिक्री) के लिए अनिवार्य दस्तावेज है। इसे लेखपाल तैयार करता है और रिकॉर्ड को पटवारी अपडेट करता है।