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सावधान: रेंडरिंग प्लांट बंद ,’800 किलो मीट वेस्ट’ से बढ़ा संक्रमण का खतरा

MP News: 5 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस प्लांट से प्रति वर्ष लगभग 5 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होने और 50 से अधिक लोगों के लिए रोज़गार सृजित होने की उम्मीद जताई गई थी।

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Risk of Infection

Risk of Infection प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)

MP News: भोपाल शहर में के आदमपुर छावनी में करीब पांच करोड़ रुपए की लागत से स्थापित मध्य प्रदेश का पहला आधुनिक रेंडरिंग प्लांट बीते सात महीनों से बंद पड़ा है। गोमांस विवाद के बाद हुई तोडफ़ोड़ और हिंसा के कारण बंद पड़े इस प्लांट के चलते शहर की स्वच्छता व्यवस्था चरमरा गई है। मृत पशुओं और स्लॉटर से निकलने वाले वेस्ट के निस्तारण की कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने से अब कचरा नालियों और खुले मैदानों में नजर आ रहा है। बता दें कि बीते साल शहर में आदमपुर छावनी में प्रदेश का पहला रेंडरिंग प्लांट पूरी शुरु किया गया था। इसमें चिकन-मटन वेस्ट से पोल्ट्री और फिश फीड तैयार की जाती रही है।

5 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस प्लांट से प्रति वर्ष लगभग 5 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होने और 50 से अधिक लोगों के लिए रोज़गार सृजित होने की उम्मीद जताई गई थी। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक यहां हर महीने लगभग 17 टन प्रोडक्शन होता रहा है। नगर निगम ने दावा किया था कि है कि मॉर्डन स्लॉटर हाऊस शुरू होने के बाद इसकी क्षमता 300 टन प्रोडक्शन हो जाएगी।

नहीं फैलता प्रदूषण

यह प्लांट मृत पशुओं और मीट वेस्ट को उच्च तापमान पर प्रोसेस कर मीट मील (बिल्ली, कुत्ते और मुर्गियों के लिए खाद्य सामग्री) और इंडस्ट्रियल ऑयल तैयार करता था। वैज्ञानिक पद्धति से निस्तारण होने के कारण प्रदूषण नहीं फैलता था और वेस्ट का दोबारा उपयोग संभव होता था।

तोडफ़ोड़ में हुआ भारी नुकसान

विवाद के दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्लांट में घुसकर जनरेटर उखाड़ दिए थे और कचरा ढोने वाले वाहनों में तोडफ़ोड़ की थी। चूंकि आधुनिक स्लॉटर हाउस और रेंडरिंग प्लांट एक ही प्रबंधन द्वारा संचालित थे, इसलिए विवाद के बाद पूरा काम ठप हो गया। इस प्लांट से न केवल 50 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला था, बल्कि नगर निगम को सालाना पांच लाख रुपये के राजस्व की प्राप्ति भी होती थी।

संकट में शहर की सेहत

निस्तारण हुआ ठप: रोजाना शहर में औसतन 50 पशुओं की मृत्यु होती है, जिन्हें अब दफनाना और उठाना मुश्किल हो रहा है।

मीट वेस्ट: मांस की दुकानों से निकलने वाला प्रतिदिन 800 किलो वेस्ट कचरा डंपिंग साइट्स और नालियों में फेंका जा रहा है।

प्रदूषण: खुले में पड़े अवशेषों के कारण तीव्र बदबू और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

इंफ्रास्ट्रक्चर: प्लांट बंद होने से नालियां चोक हो रही हैं, जिससे जल निकासी प्रभावित है।