भोपाल

हाइवे पर दुर्घटना होते ही पहुंचेगी एम्बुलेंस

1099 को 108 से जोड़ा जाएगा

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Apr 11, 2018

भोपाल। प्रदेश के 71 टोल नाकों की एम्बुलेंस को 108 टोल फ्री कॉल सेंटर से जोड़ा जाएगा। इससे हादसों में घायलों को गोल्डन अवर पर अस्पताल पहुंचाने में मदद मिलेगी। अभी इनका नंबर 1099 है। अब ये एम्बुलेंस आसपास के अन्य स्थानों के घायलों को भी नजदीकी अस्पतालों तक पहुंचाने का काम करेंगी। 108 के कॉल इनके पास स्थानांतरित किए जाएंगे। इनका रेस्पांस टाइम अधिकतम सात मिनट माना जा रहा है। इनमें ऑक्सीजन सिलेंडर, दवाइयों के साथ पैरामेडिकल स्टाफ भी रहेगा। इन एम्बुलेंस को इक्यूप्मेंट देने पर पर मध्यप्रदेश डेवलपमेंट कारपोरेशन (एमपीआरडीसी) करीब 20 लाख रुपए खर्च करेगा।

अभी टोल नाकों की एम्बुलेंसों को 1099 टोल फ्री नम्बर से ऑपरेट किया जाता है। इसके लिए एमपीआरडीसी के कार्यालय में एक्सीडेंट रेस्पांस सिस्टम लगाया गया है। इसे ऑपरेट करने का ठेका नीदरलैंड की कंपनी को दिया गया है। इन एम्बुलेंसों का जीपीआरएस ठीक से काम नहीं करने, कॉल सेंटर में तुरंत रेस्पांस नहीं देने और एम्बुलेंस घटनास्थल पर देरी से पहुंचने के कारण नई व्यवस्था की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग इनकी कंडीशन की जांच भी कराएगा।

हर दिन 35 से 40 कॉल
एक्सीडेंट रेस्पांस सिस्टम पर हर दिन करीब 35 से 40 कॉल आते हैं। इनको संबंधित टोल नाकों तक स्थानांतरित किया जाता है। अब 108 और 1099 को जोडऩे पर कॉल की संख्या बढ़ जाएगी। टोल नामों पर ज्यादा सबसे ज्यादा (40) एम्बुलेंस मारूति ओमनी और पांच टेम्पो ट्रेक्स हैं।

टोल नाकों की एम्बुलेंस को इंटीग्रेटेड करने की प्रक्रिया चल रही है। एमपीआरडीसी जैसे ही अपना काम पूरा कर लेगा, इन एम्बुलेंसों को 108 से जोड़ देंगे।
- गौरी सिंह, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य विभाग

किसी भी दुर्घटना के बाद आधा घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है, इसे मरीज के लिए गोल्डन अवर कहते हैं। इस दौरान इलाज मिलने से जान बचाने की संभावना 60 फीसदी बढ़ जाती है। इसके बाद आने पर मरीज की जिंदगी बचाना ज्यादा मुश्किल हो जाता है।
-डॉ. एसके माली, विशेषज्ञ अस्थी रोग विभाग जेपी अस्पताल

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Published on:
11 Apr 2018 08:37 pm
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