भोपाल

नाबालिग बेटे को उकसाकर कराती थी लूट, मां को 3 साल की सजा

कोर्ट का फैसला

2 min read
Aug 29, 2018
न्यायाधीश ने बचाव और अभियोजन पक्ष की दलील सुनने के बाद फैसला सुनाया।

नाबालिग बेटे को लूट और चोरी के लिए उकसाकर लूट कराने वाली काजी कैंप निवासी मां अफरोज बी को अदालत ने 3 साल के सश्रम कारावास-2 हजार रूपये जुर्माने की सजा सुनाई है। बेटे को लूट और चोरी के लिए उकसाने के मामले में मां को यह पहली सजा है। अपर सत्र न्यायाधीश भूभास्कर यादव ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया है। मामला हबीबगंज थाने का है। सरकारी वकील मंजू जैन सिंह ने बताया कि काजी कैंप निवासी अफरोज अपने 15 वर्षीय नाबालिग बेटे आसिफ को लूट और चोरी करने के लिए उकसाती थी।

यह बात लूट के मामले में पकड़े जाने के बाद पूछताछ में खुद बेटे आसिफ ने पुलिस को बताई थी। आसिफ खान ने मां के उकसाने पर 16 सितंबर 2016 को शाम करीब 6 बजे 12 नंबर स्टॉप से पैदल अरेरा कॉलोनी स्थित घर जा रही महिला किरण भाटिया से पर्स लूट लिया था। पर्स में मोबाइल फोन, नगदी सहित अन्य सामान था। पुलिस ने पर्स और लूटा गया सामान आसिफ से बरामद किया था। आसिफ ने पुलिस को बताया था कि उसकी मां के कहने पर उसने लूट की थी। पुलिस ने आसिफ के साथ ही मां के खिलाफ भी लूट के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया था।

शेल्टर होम दुष्कर्म मामला : चालान पेश करने पुलिस पहुंची कोर्ट,जज ने वापस लौटाया अवधपुरी थाना अंतर्गत हॉस्टल में मूकबधिर छात्राओं के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में विशेष जांच दल मंगलवार को चालान पेश करने कोर्ट पहुंचा। हालांकि आरोपी अश्विनी शर्मा की रिमांड पेशी 29 अगस्त को होने से अदालत ने चालान नहीं लिया। विशेष सत्र न्यायाधीश एट्रोसिटी एक्ट पंकज गौड़ की अदालत में पुलिस चालान पेश करने पहुंची।

मामले के जांच अधिकारी हबीबगंज सीएसपी भूपेन्द्र सिंह करीब आधा दर्जन पुलिसकर्मियों के साथ चालान लेकर अदालत पहुंचेथे। मुख्य आरोपी अश्विनी शर्मा इस मामले में जेल में बंद है। अश्विनी शर्मा की रिमांड पेशी बुधवार को है। जज ने बुधवार को अश्विनी शर्मा के सामने चालान पेश करने पुलिस को कहा। इसके बाद पुलिस दल बगैर चालान पेश किये ही वापस लौट गया।

सरकारी वकील पुनीत तिवारी ने बताया कि चालान करीब साढ़े 700 पन्नों का है। पुलिस ने मामले में करीब 80 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किये हैं। गवाहों में पीडि़त मूक-बधिर छात्राएं, उनके परिजन, सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारी, डॉक्टर, पुलिसकर्मी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि छात्रावास में मूक-बधिर छात्राओं के साथ दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी अश्विनी शर्मा के खिलाफ तीन मुकदमे दर्ज किये थे। जिस चालान को पेश करने पुलिस अदालत पहुंची थी वो अवधपुरी थाने का पहला मामला है।

इसके अलावा एक मामले की जांच सीएसपी जयंत राठौर और एक अन्य मामले की जांच महिला थाना प्रभारी के पास है। सामाजिक न्याय विभाग को नोटिस देगी एसआईटी अश्विनी को सरकारी अनुदान देने वाले सामाजिक न्याय विभाग को एसआईटी नोटिस देगी। नोटिस में उन सवालों के जवाब पुलिस मांगेगी जो अपराध से जुड़े होंगे। बुधवार को पुलिस नोटिस भेज सकती है।

एसआईटी प्रमुख एसपी राहुल लोढ़ा ने बताया कि अनुदान की जांच पुलिस नहीं करेगी। सामाजिक न्याय विभाग इसकी जांच कर सकता है। 87 गवाहों को किया शामिल एसआईटी ने दुष्कर्म के एक मामले में 87 लोगों को गवाह बनाया है। इनमें 37 गवाह पुलिस की प्रमुखता सूची में हैं। बाकि के गवाह दूसरी वरीयता में रहेंगे। गवाहों में साइन लैग्वेज के एक्सपर्ट के साथ हॉस्टल में रहने वाली युवतियां, पीडि़ताओं के परिजन शामिल हैं।

Published on:
29 Aug 2018 11:54 am
Also Read
View All