90 दिन अंदर डिजी लॉकर में अपलोड हो जाएगा 3 लाख से अधिक छात्रों का डेट-बीयू के आदेश के बाद कॉलेजों ने शुरू प्रक्रिया, ली जा रही है छात्र-छात्राओं से जानकारी
भोपाल.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के चलते इन दिनों विद्यार्थियों का डाटा डिजिटल प्रारूप में बदलने की प्रक्रिया तेजी से की जा रही है। यह प्रक्रिया स्नातक पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के लिए है। ऐसे में प्रथम और द्वितीय वर्ष पास कर चुके सभी विद्यार्थियों की जानकारी बरतउल्ला यूनिवर्सिटी द्वारा कॉलेजों से मांगी गई है। डीजी लॉकर एक ऐप है जिसमें विद्यार्थियों का डाटा रखा जा सकता है।
इतना ही नहीं इस लॉकर में डिग्री और ट्रांसक्रिप्ट भी स्टोर करके रखी जाएगी।
-विदेश और अन्य राज्यों के छात्रों को होगा फायदा
तीन लाख से अधिक विद्यार्थियों का डाटा डीजी लॉकर में अपडेट किया जाएगा। इसका फायदा उन बच्चों को सबसे ज्यादा होगा जो विदेशों में नौकरी करने के लिए जाते हैं या फिर दूसरे उच्च शिक्षण संस्थानों में जाते हैं उन्हें विद्यार्थियों का डाटा जांचने में भी आसानी होगी।
- बीयू को बनाया नोडल एजेंसी
यूजीसी के आदेश के बाद बरकतउल्ला विश्वविद्यालय को डिजि लाकर के लिए नोडल सेंटर बनाया गया है। प्रदेश के अन्य सभी विश्वविद्यालयों को अपना डाटा बीयू विश्वविद्यालय को भेजेगा होगा। उसके बाद एजेंसी डाटा को अपलोड करने का काम करेगी। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार इंदौर सहित कुछ विश्वविद्यालय में डाटा भेजा है उसे अपलोड करने का काम जारी है।
- यूजीसी ने 2020 में जारी की थी गाइडलाइन
यूजीसी ने नेशनल डिपाजिटरी स्कीम के तहत 4 साल पहले देशभर के विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों का डाटा डिजिटल करने पर जोर दिया। लेकिन स्थिति यह है कि अब तक इस पर काम नहीं हो सका है। यूजीसी की गाइडलाइन के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के सभी विश्वविद्यालयों को एनईपी वाले विद्यार्थियों की जानकारी को डिजिकल प्रारूप में बदलने के आदेश जारी किए हैं।
देरी का यह है कारण
कॉलेज प्राचार्य के अनुसार विद्यार्थियों के कॉलेज ना आने के कारण दस्तावेज अपलोड नहीं हो पा रहे हैं। दस्तावेजों के लिए छात्रों से संपर्क किया जा रहा है। कई छात्रों के नंबर बंद हैं, ऐसे में उनके दस्तावेज अपलोड करना चुनौती बना हुआ है।
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एनईपी वाले बीए, बीकाम, बीएससी, बीबीए, बीसीए सहित अन्य यूजी कोर्स वाले विद्यार्थियों का डाटा पर काम हो रहा है। इनकी अंकसूची, नामांकन, माइग्रेशन, टीसी, आधार नंबर, जन्म तारीख आदि जानकारी शामिल है। इसमें यूजी फर्स्ट-सेकंड ईयर एवं फाइनल ईयर के 3 लाख से अधिक विद्यार्थी शामिल हैं।
प्रो. एसके जैन, कुलपति बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी