मानव संग्रहालय में चल रहे 43वें वर्षगांठ समारोह में मेघालय और असम के बैंड ने दी परफॉर्मेंस
भोपाल। मानव संग्रहालय में चल रहे 43वेंवर्षगांठ समारोह में शनिवार को मेघालय और असम के बैंड ने परफॉर्मेंस दी। मेघालय की रीडा एण्ड म्यूजिकल फोक्स बैंड एक उद्देश्य को लेकर 2013 में तैयार किया गया। बैंड की रीडा गाथो का कहना है एनजीटी ने मेघालय में लोक माइन और लाइम स्टोन माइन को बंद कर दिया। लेकिन अब भी वहां धड़ल्ले से अवैध खनन चल रहा है। लकड़ी के लिए जंगलों को काटा जा रहा है। वहां रहने वाली खासी और जयंतिया जनजाती हमेशा से प्रकृति से जुड़ी रही हैं।
नेचर वहां की परंपराओं में बसता है। अवैध खनन को खत्म करने के लिए आवाज उठाना आसान नहीं, क्योंकि इसमें अफसर से लेकर माफिया तक जुड़े हैं। हमारा बैंड इस खत्म को खत्म करने के लिए दोनों ही जनजातियों के लोगों को अवेयर करने का काम कर रहा है। हम म्यूजिक के माध्यम से लोगों को इस आंदोलन से जोड़ रहे हैं। ग्रुप के सदस्य इस्ट खासी हिल्स जिले के गांवों व अन्य शहरों से हैं। ग्रुप ने नेचरल, क्लाउड्स, सुरकामिया और टेक्नोसेंट्रीक पर परफॉर्म किया।
लोक धुनों का किया फ्यूजन
मो एण्ड शूटिंग स्टार्स ग्रुप असम का एक लोकप्रिय ग्रुप है। शिलॉन्ग के 5 कलाकारों ने मिलकर 2015 में अपना बैंड बनाया। जो हिन्दी, अंग्रेजी के साथ असमिया भाषा में परफॉर्म करता है। ग्रुप की मृण्मयी गोस्वामी का कहना है कि 2015 में स्मोकी बैंड शिलॉन्ग में परफॉर्म करने आया था। इस इवेंट में हमें पहली बार मौका मिला था। ग्रुप मैनलैंड असम के फॉक म्यूजिक का फ्यूजन करता है।
इस म्यूजिक में प्रकृति, प्रेम, परंपरा और धार्मिक भावों की झलक देखने को मिलती है। ग्रुप ने समारोह में ओझापाली(शंकरदेव ट्रेडिशन) का फ्यूजन पेश किया। वह भारत रत्न भूपेन्द्र हजारिका के असमिया सॉन्ग्स को भी अपने अंदाज में पेश किया। दर्शकों को असम के उत्सव में होने वाले बिहू गानों को भी यहां सुनने को मिले।
महिलाएं संभालती हैं अर्थव्यवस्था
स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित 'पूर्वोत्तर भारत की महिलाएं: योगदान और चिंतनÓ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन के सत्र में डॉ. करिश्मा के लेप्चा, डॉ. विजयालक्ष्मी बरार, डॉ. संध्या थापा, डॉ. पद्मिनी बलराम और डॉ. विसाखोनु हिबो ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। डॉ. करिश्मा ने सिक्किम के विभिन्न गांवों और समुदायों के महिलाओं के बारे में बताते हुए कहा कि यहां महिलाएं गृहस्थी और अर्थव्यवस्थाओं को नियंत्रित करती हैं।
डॉ. बारा ने 'मणिपुर की महिलाएं: अतीत की विरासत और वर्तमान की विरासत' विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। वहीं, एक अन्य सत्र में प्रो. डीके बेहेरा (कुलपति, संबलपुर विवि ओडिशा) ने 'मानवशास्त्र में उभरता हुआ बचपन-बच्चे एवं बचपन' विषय पर 15वां वार्षिक इगांरामासं व्याख्यान को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुछ दशकों में भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों ने अपनी विशाल संसाधन क्षमता, जनजातीय ऐतिहासिकता और सांस्कृतिक विविधता के कारण व्यापक रूप से लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। बच्चों की आवाज को अनुसंधान के लिए सुना और दर्ज किया जाना ।