
AIIMS Bhopal Research: हाई ब्लड प्रेशर की दवा रोज लेने वाले मरीजों को भी कई बार अपनी बीमारी की बुनियादी जानकारी नहीं होती। उन्हें यह तक पता होता कि बीपी की सही सीमा क्या है, कब बीपी खतरनाक होता है और घर पर इसकी निगरानी क्यों जरूरी है। एमपी में एम्स भोपाल की भागीदारी वाले देशव्यापी अध्ययन में यह वाली तस्वीर सामने आई है। 12 राज्यों के 18 मेडिकल संस्थानों में 1,920 हाई बीपी मरीजों पर हुए अध्ययन में सात सवालों के आधार पर बीमारी की जानकारी का मध्य स्तर सिर्फ एक रहा।
अध्ययन में मरीजों की जानकारी को चार प्रमुख क्षेत्रों में परखा गया। क्लिनिक और घर पर बीपी की सही सीमा, हाई बीपी के कारण, अनियंत्रित बीपी से होने वाले नुकसान और घर पर बीपी नापने के फायदे। सबसे बड़ी कमी बीपी की सही सीमा और घर पर निगरानी के फायदे समझने में मिली। अध्ययन में 20 से 70 वर्ष की उम्र के ऐसे मरीज शामिल किए गए, जो कम से कम तीन महीने से हाई बीपी की दवा ले रहे थे। शोध नवंबर 2022 से जून 2023 के बीच किया गया।
अध्ययन में 47.5 फीसदी मरीज पहले से घर पर बीपी नाप रहे थे। इनमें अपेक्षाकृत बेहतर जानकारी रखने वालों का अनुपात 46.9 फीसदी था, जबकि घर पर बीपी नहीं नापने वालों में यह 29.9 फीसदी रहा। यानी घर पर बीपी की निगरानी करने वालों की समझ बेहतर थी, लेकिन उनमें भी बीमारी की जानकारी पर्याप्त नहीं थी।
अधिक शिक्षित, निजी स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज लेने वाले और पहले से घर पर बीपी नापने वाले मरीजों में जानकारी अपेक्षाकृत अच्छी थी। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ बीमारी की जानकारी कम होने का संबंध भी सामने आया। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि सिर्फ बीपी मशीन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। मरीजों को यह भी समझाना जरूरी है कि बीपी की सही सीमा क्या है, मशीन से सही तरीके से जांच कैसे करनी है और कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अनियंत्रित हाई बीपी स्ट्रोक और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ाता है।
एक स्वस्थ वयस्क का सामान्य ब्लड प्रेशर (BP) 120/80 mmHg या इससे कम होना चाहिए। इसमें ऊपर वाली संख्या (सिस्टोलिक) 120 से कम और नीचे वाली संख्या (डायस्टोलिक) 80 से कम होनी चाहिए।
नॉर्मल (सामान्य): 120/80 mmHg से कम
बढ़ा हुआ (Elevated): 120-129 और 80 से कम
हाई बीपी (स्टेज 1): 130-139 या 80-89
हाई बीपी (स्टेज 2): 140/90 mmHg या इससे अधिक
लो बीपी (निम्न रक्तचाप): 90/60 mmHg से कम