24 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

एमपी में गायब हो रहे हैं चाचा-चाची, मामा-मामी, बुआ और मौसी जैसे रिश्ते, रिपोर्ट में खुलासा

NFHS Report 2023-24 : नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (2023-24) की रिपोर्ट में चौकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। शहरी युवाओं को शादी और संतानोत्पत्ति में जल्दबाजी नहीं। 5 साल में 15 से कम उम्र की आबादी 3% घटी।
2 min read
Google source verification
NFHS Report 2023-24

'न्यूक्लियर फैमली' से सिमट रहे चाचा-बुआ के रिश्ते (फोटो सोर्स- Patrika)

MP News : नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (2023-24) की रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश में समाज और स्वास्थ्य के बदलते पैटर्न को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े उजागर किए हैं। कम संतान और सिमटते एकल परिवारों (न्यूलियर फैमिली) के चलन से पारिवारिक रिश्तों की पहचान पर संकट मंडराने लगा है। हालात ये हैं कि, चाचा-चाची, मामा-मामी, बुआ और मौसी जैसे रिश्ते गायब हो रहे हैं। बच्चों की दुनिया सिर्फ 'अंकल- आंटी' तक सिमटती जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के शहरों में 15 साल से कम उम्र के बच्चों की आबादी 25.8 फीसदी से घटकर 22.7 फीसद रह गई है। 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की संख्या भी 8.4 से गिरकर 6.9 फीसद पर आ गई है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में यह 9 फीसद दर्ज हुई है। राहत की बात ये है कि, प्रदेश में बुजुर्गों (60 वर्ष से अधिक) की संख्या में इजाफा हुआ है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़कर 11.5 फीसद और शहरी क्षेत्रों में 11.7 फीसद हो गई है।

देर से शादी का चलन

प्रदेश के युवा अब जल्दी शादी करने के पक्ष में नहीं हैं। शहरों में 18 साल से कम उम्र में लड़कियों के विवाह का आंकड़ा 20 से घटकर 9 फीसद ही रह गया है। 21 साल से पहले शादी करने वाले पुरुष भी 25 फीसद से घटकर 16.2 फीसद पर आ गए हैं। देर से विवाह के कारण शहरी महिलाओं की प्रजनन दर घटकर 1.7 बच्चा प्रति महिला ही रह गई है।

खराब जीवनशैली से मोटोपा-तनाव जैसी बीमारियां

प्रदेश में मोटापे की समस्या तेजी से फैल रही है। खास बात ये है कि, इसमें महिलाएं पुरुषों से आगे हैं। शहरों में 36.1 फीसद महिलाएं जबकि 26.9 फीसद पुरुष मोटापे की चपेट में हैं। मानसिक तनाव के कारण ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। शहरों में लगभग 20.8 फीसद पुरुष और 18.4 फीसद महिलाएं बीपी, जबकि 21.6 फीसद पुरुष और 18.6 फीसद महिलाएं शुगर की दवाएं नियमित रूप से ले रहे हैं।

ये रोचक बदलाव भी दिखे

-गर्भवतियों पर हिंसा: गर्भावस्था के दौरान हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। शहर में 2.6 फीसद व गांव में 2.2 फीसदी महिलाएं प्रभावित।
-तंबाकू से दूरी: तंबाकू के सेवन में गिरावट। पुरुषों में इस्तेमाल 47.7 फीसद से घटकर 35.2 फीसद और महिलाओं में 7.4 फीसद रह गया है।
-घटता घरेलू विवाद: शहरों में पतियों से झगड़े की शिकायतें 21.4 फीसद से घटकर 17.7 फीसद रह गईं हैं।
-शराब का बदलता रुझान: शहरों में पुरुषों का आंकड़ा 18.5 फीसद से गिरकर 13.7 फीसद हुआ, लेकिन गांव में शराब का सेवन करने वाले पुरुष 17 फीसद से बढ़कर 20.4 फीसद पहुंच गए हैं।

(डेटा: 2023-24 और 2019-21 की रिपोर्ट के अनुसार है।)