
भोपाल. बीजेपी उम्मीदवार साध्वी ठाकुर भोपाल से उम्मीदवार बनने के बाद से ही विरोधियों के निशाने पर हैं। उन्हें चुनाव लड़ने से रोकने के लिए मालेगांव ब्लास्ट एक पीड़ित के पिता ने एनआईए कोर्ट में याचिका भी लगाई है। साथ ही कई लोगों ने चुनाव आयोग से भी शिकायत की है और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग की है।
दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने पूरे दिल्ली में साध्वी प्रज्ञा के लिए पोस्टर लगवाए हैं। उस पर लिखा है कि अब न्याय होगा। पोस्ट में तस्वीर प्रज्ञा के जेल के दिनों की है। साथ ही इसे सोशल मीडिया पर भी खूब प्रचारित किया जा रहा है।
वहीं, जब प्रज्ञा विरोधियों के निशाने पर आई है, उसके बाद से ही पार्टी के नेता साध्वी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। पहले पार्टी प्रमुख अमित शाह ने ट्वीट कर लोगों को बताया कि उन्होंने भोपाल से साध्वी को उम्मीदवार क्यों बनाया है। उन्होंने लिखा था कि राहुल गांधी और कांग्रेस देश को सुरक्षित नहीं कर सकते वो तो बस हिंदू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद बोलकर पूरी दुनिया में हिंदू धर्म को बदनाम कर सकते हैं। अमित शाह ने कहा कि भाजपा ने इसलिए तय किया है कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को भगवा आतंकवाद शब्द के जन्मदाता दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारेगी।
इसके साथ ही बीजेपी के नेता राम माधव ने भी प्रज्ञा का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें उम्मीदवार बनाने का फैसला मध्यप्रदेश यूनिट का है। वह दिग्विजय सिंह जैसे व्यक्ति के लिए सही चुनौती हैं, जो इस देश में हिंदू आतंक के संदिग्ध और शरारती विचार के प्रचार के लिए काफी हद तक जिम्मेवार हैं। उन्हें एक उचित चैलेंजर की जरूरत थी।
कौन हैं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर
राष्ट्रीय फलक पर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पहली बार तब चर्चा में आईं जब उनका नाम 2008 में मालेगांव ब्लास्ट से जुड़ा। उसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई। 9 साल बाद जब जमानत पर वो बाहर आईं तो कहा था कि कांग्रेस की सरकार ने उन्हें तरह-तरह की यातनाएं दी हैं। साथ ही उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाया गया था। प्रज्ञा 2007 में आरएसएस के प्रचारक रहे सुनील जोशी हत्याकांड में भी आरोपी थी। बाद में उस मामले में भी बरी हो गई। वह मध्यप्रदेश की भिंड की रहने वाली हैं। उनका सूरत में भी आश्रम है।