Bilaspur News: हाईकोर्ट ने पीएससी 2022 मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी नियुक्तियों को हाईकोर्ट के आगामी निर्णय से बाधित रखा है।
बिलासपुर। Chhattisgarh News: हाईकोर्ट ने पीएससी 2022 मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी नियुक्तियों को हाईकोर्ट के आगामी निर्णय से बाधित रखा है।
शिवम् कुमार देवांगन और सागर वर्मा ने वर्ष 2022 पीएससी मुख्य परीक्षा में शामिल होकर क्रमश: 771 और 845 अंक प्राप्त किए थे। परीक्षा परिणाम घोषित हुआ तो उन्होने पाया कि काफी कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी चयनित हो चुके थे और ज्यादा नम्बर के बाद भी इनको चयन से अयोग्य कर दिया गया। पीएससी के सबंधित सेल से संपर्क करने पर उनको बताया गया कि उन्होंने आयोग द्वारा जारी नियम, कंडिका का उल्लंघन किया है इसलिए दोनों को अपात्र किया गया है।
याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत नहीं
जस्टिस अरविन्द सिंह चन्देल की एकलपीठ ने तर्क सुनने के बाद कहा कि हम याचिकाकर्ता को कोई अंतरिम राहत नहीं दे रहे हैं। इसके बावजूद पीएससी 2022 की सभी नियुक्तियों को इस याचिका पर कोर्ट के आगामी निर्णय के अधीन रखा जाए।
हाईकोर्ट से कमेटी गठित कर जांच की मांग
दरअसल मुख्य उत्तरपुस्तिका में एक प्रतिवेदन लिखना था , जिसमें अपना सही नाम ,पता और अनुक्रमांक छोड़कर कोई अन्य उल्लेख करना था। याचिकाकर्ताओं में से शिवम् ने प्रतिवेदन में एक नाम राधेश्याम लिख दिया। इसी प्रकार सागर ने सिर्फ एक्स वाय जेड प्रेषक का नाम लिखा था। इसे ही आयोग ने गलत बताते हुए चयन से वंचित कर दिया। जिन लोगों का चयन हुआ है उन सबने भी प्रतिवेदन में इसी तरह के नाम पते लिखे, मगर उनको चुन लिया गया। याचिकाकर्ता के एडवोकेट रोहित शर्मा ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि कोर्ट के निर्देशानुसार एक स्वतन्त्र कमेटी गठित की जाए जो जांच के बाद पुन: नई सूची जारी करे।