
एक्सरसाइज और रेस्ट यदि हर दिन एक ही समय पर हो तो जोड़ों और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानियों से निजात मिल सकती है। उनके एथलेटिक प्रदर्शन में सुधार आता है और चोट से बचने में भी मदद मिलती है। यह अध्ययन यूके के नेचर कम्यूनिकेशंस में प्रकाशित हुआ है, जिसमें चूहों को शामिल किया गया था। वैज्ञानिक लंबे समय से जानते हैं कि मस्तिष्क के बॉडी क्लॉक और अन्य अंगों के बॉडी क्लॉक के बीच समन्वय होना जरूरी है, यदि ऐसा नहीं होता है तो मधुमेह और हृदय रोग जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
शोध कर्ताओं के मुताबिक हमने यह समझने के लिए एक नए तंत्र की पहचान की है कि हमारे शरीर की घड़ियां बाहरी वातावरण के साथ कैसे समन्वय करती हैं। ये क्लॉक आपको परिवर्तनों के लिए तैयार करने के लिए विकसित हुई हैं।
अध्ययन से यह आया सामने
रिसर्च से सामने आया है कि सुबह की शारीरिक गतिविधियां और नींद—जागने के चक्र
के बारे में ब्रेन क्लॉक हिड्डयों के ऊतकों तक समय की जानकारी पहुंचाती हैं। यदि व्यक्ति व्यायाम के समय में बदलाव करता है, तो इस डीसिंक्रनाइज़ेशन के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है। शोध चूहों पर किया गया था, जिसमें ट्रेडमिल पर चूहों को नियमित एक ही समय में एक्सरसाइज करवाई गई थी।
बढ़ती आयु में मददगार
बढ़ती हुई आयु में यदि इस पैटर्न पर एक्सरसाइज या आराम किया जाए, तो ज्यादा स्वस्थ रहा जा सकता है। शोध के मुताबिक सीनियर सिटीजंस के लिए यह पैटर्न अधिक फायदेमंद हो सकते हैं।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।