
अच्छी डाइट व पर्याप्त नींद लेने के बावजूद यदि व्यक्ति थकान व अकेलापन महसूस करने के साथ एकाग्रता में कमी अनुभव करें तो इसकी वजह रोज की एक जैसी दिनचर्या हो सकती है। शहरी लोगों में यह आम समस्या है जिसे हैल्थ एक्सपर्ट्स ने 'नेचर डेफिसिट डिसऑर्डर' ( Nature Deficit Disorder ), का नाम दिया है।
ईको या ग्रीन थैरेपी : लगातार कृत्रिम रोशनी और माहौल में रहने से इंसान प्रकृति से दूर होने लगता है और उसमें तनाव, बेचैनी जैसे मानसिक रोग पनपने लगते हैं।मनोवैज्ञानिक व फिजीशियन ईकोथैरेपी या ग्रीन थैरेपी लेने की सलाह देते हैं ताकि प्रकृति से जुड़ाव बना रहे और सुकून महसूस हो सके।
कुछ पल हरियाली संग : सेहत वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य की रोशनी में हीलिंग पावर होने के साथ विटामिन-डी होता है। इस रोशनी में कुछ समय बिताने से तनाव कम होता है व रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। 'वुड थैरेपी' के तहत हरियाली के बीच कुछ समय बिताने से खुशनुमा अनुभव होता है।