
हेयर डाइ में मिले केमिकल से होने वाले नुकसान को संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए लेकिन दिसंबर में जारी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के शोध अनुसार उन अमरीकी महिलाओं में स्तन कैंसर की आशंका ज्यादा होती है जो नियमित रूप से अपने बालों को रंगने के लिए स्थायी डाई का इस्तेमाल करती हैं। अमरीकी संस्था आर्प के एक सर्वे के अनुसार 37 से 53 साल की 69 फीसदी और 45 से 72 साल की 64 फीसदी महिलाओं का एक बड़ा वर्ग बाल डाई करता है।
बालों को डाइ करना या उन्हें रंगने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर में बीते दिनों प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक परमानेंट डाइ करने वाली अफ्रीकी मूल की अमरीकी महिलाओं में स्तन कैंसर के कुछ मामले सामने आए हैं। हालांकि इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी खामी यह है कि शोधकर्ता डाइ के कारण कैंसर के प्रभाव को स्पष्ट नहीं कर पाए हैं। रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने कहा है कि शोध में शामिल सभी महिलाओं के परिवार के किसी न किसी महिला सदस्य मेंं स्तन कैंसर की चिकित्सकीय इतिहास रहा है। शोध में 5 से 8 सप्ताह के अंतर से की जाने वाली डाइ को स्थायी डाइ कहा है।
डरे नहीं, सतर्क जरूर रहें -
अध्ययन में यह स्पष्ट नहीं है कि शोध में शामिल महिलाओं के कैंसर से जुड़े स्थानीय आंकड़े क्या हैं? वहीं अध्ययन भारतीय आबादी के लोगों पर नहीं हुआ है इसलिए इसे सीधे तौर पर भारतीय संदर्भ में न देखें क्योंकि कैंसर के कई कारण हो सकते हैं।
चौंकाने वाले नतीजे -
शोधकर्ताओं ने 35 से 74 साल की उम्र के बीच की 46,709 महिलाओं को शोध में शामिल किया। इनके परिवार की कम से कम एक महिला का स्तन कैंसर का इलाज हुआ था। इनमें से 55 फीसदी महिलाओं ने स्थायी रूप से बाल डाई करना स्वीकारा। सह-लेखिक एलेक्जेंड्रा व्हाइट का कहना है कि शोध को जागरुकता के रूप में देखें। वहीं वैज्ञानिक भी परिणाम से असंतुष्ट हैं और अधिक शोध की जरुरत बता रहे हैं। हालांकि अमरीकन कैंसर सोसायटी की सलाह है कि गर्भावस्था या शुरू के तीन माह हेयर डाइ से बचना चाहिए।