इन दिनों ऐसा स्टोन देखने में आ रहा है जो बनता तो किडनी में है लेकिन फिर यूरेटर में चला जाता है। इससे मरीज को तेज दर्द के साथ उल्टी की समस्या हो जाती है।
इन दिनों किडनी स्टोन की बजाय यूरेटर में पथरी के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खानपान की गलत आदतों के कारण किडनी स्टोन के प्रारूप में परिवर्तन आने से इस तरह की समस्याएं बढ़ रही हैं। इन दिनों ऐसा स्टोन देखने में आ रहा है जो बनता तो किडनी में है लेकिन फिर यूरेटर में चला जाता है। इससे मरीज को तेज दर्द के साथ उल्टी की समस्या हो जाती है।
खानपान है जिम्मेदार -
कार्बोनेटेड ड्रिंक, जंकफूड, वसा और अल्कोहल की अधिक मात्रा इसकी मुख्य वजह हैं। इन चीजों में पाया जाने वाला यूरिक एसिड शरीर में स्टोन का निर्माण करता है। यूरेट्रिक स्टोन सामान्य किडनी स्टोन से आकार में 5-8 एमएम या उससे भी छोटे होते हैं और तेज व असहनीय दर्द का कारण बनते हैं जिसे 'यूरेट्रिक पेन' या 'यूरेट्रिक कॉलिक' भी कहते हैं। एक साथ कई स्टोन भी बन सकते हैं।
किडनी स्टोन के मामले पहले के समय में अधिक थे जो नमक इकट्ठा होने की वजह से होते थे। ज्यादातर ऐसा गर्मियों में होता था क्योंकि पेशाब कम आने पर मौजूद नमक जम जाता था।
इलाज : यूरेट्रिक स्टोन का इलाज दो चरणों में होता है। पहले दर्द की रोकथाम करते हैं फिर दर्द में राहत मिलने पर यूरिन टैस्ट, अल्ट्रासोनोग्राफी व सीटी स्कैन किया जाता है। इससे स्टोन की लोकेशन का पता चलता है जिसे लेजर बीम या होलमियम लेजर से नष्ट करते हैं।
सावधानी : रोजाना कम से कम पांच लीटर पानी पिएं व पालक, नट्स, डेयरी प्रोडक्ट आदि से परहेज करें।