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जीवनदर में हुई बढ़ोतरी, डेंगू बना चुनौती – रिपोर्ट

भारत में पिछले कई दशकों के दौरान जीवन प्रत्याशा में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल-2019 की हाल ही में जारी रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई...

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Nov 01, 2019
Life expectancy increased in india, Dengue Raise as challenge
जीवनदर में हुई बढ़ोतरी, डेंगू बना चुनौती - रिपोर्ट

भारत में पिछले कई दशकों के दौरान जीवन प्रत्याशा में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल-2019 की हाल ही में जारी रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई। इस रिपोर्ट के अनुसार, 1970-75 के समय भारत में जीवन प्रत्याशा जहां 49.7 वर्ष थी, वहीं 2012-16 में यह बढ़कर 68.7 वर्ष तक पहुंच चुकी है। इसी अवधि में महिलाओं के लिए जीवन प्रत्याशा 70.2 वर्ष और पुरुषों के लिए 67.4 वर्ष आंकी गई है।

अगर पिछले साल के सर्वेक्षण से तुलना की जाए तो जीवन प्रत्याशा 1970-75 के समय 49.7 वर्ष से बढ़कर 2011-15 में 68.3 वर्ष बताई गई थी। इसी अवधि में महिलाओं के लिए जीवन प्रत्याशा ( Life expectancy ) 70 वर्ष और पुरुषों के लिए 66.9 वर्ष आंकी गई। इस लिहाज से सामान्य रूप से और पुरुषों की जीवन प्रत्याशा में वृद्धि दर्ज की गई है।

गैर-संचारी (एक-दूसरे के संपर्क में आने से नहीं फैलने वाले) रोगों के बारे में सर्वेक्षण में कहा गया है कि एनसीडी क्लीनिकों में उपस्थित 6.51 करोड़ रोगियों में से 4.75 फीसदी लोग मधुमेह से पीड़ित हैं। इसके अलावा 6.19 फीसदी लोग उच्च रक्तचाप से पीडि़त मिले जबकि 0.30 फीसदी हृदयवाहिनी रोगी मिले। स्ट्रोक को रोगी 0.10 फीसदी जबकि सामान्य कैंसर के रोगी 0.26 फीसदी सामने आए।

सर्वेक्षण के अनुसार, दिल्ली के एनसीटी द्वारा प्रति वर्ग किलोमीटर 11,320 लोगों के साथ उच्चतम जनसंख्या घनत्व रिपोर्ट दर्ज की गई। जबकि अरुणाचल प्रदेश में सबसे कम 17 जनसंख्या घनत्व है।

वर्ष 1991 से 2017 तक भारत में जन्मदर, मृत्युदर और प्राकृतिक विकास दर में लगातार कमी आई है। भारत में 2017 तक प्रति एक हजार जनसंख्या पर जन्मदर 20.2 जबकि मृत्युदर 6.3 दर्ज की गई है। हालांकि जनसंख्या में वृद्धि जारी है, क्योंकि जन्मदर में गिरावट मृत्युदर में गिरावट जितनी तेजी से नहीं हो रही है।

शिशु मृत्युदर में काफी गिरावट आई है। (2016 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों में 33), हालांकि ग्रामीण (37) और शहरी (23) के बीच अंतर अभी भी काफी अधिक हैं।

सर्वेक्षण में पाया गया है कि संचार संबंधी बीमारी की बात करें तो 2018 में छत्तीसगढ़ में मलेरिया के कारण अधिकतम मौतें हुई हैं। यहां मलेरिया के 77,140 मामले सामने आए जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई। एडीज मच्छरों द्वारा फैलने वाला डेंगू और चिकनगुनिया भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ी चिंता का कारण बताया गया है।

साल 2012 और 2013 की तुलना में 2014 में स्वाइन फ्लू के मामलों व मौतों की संख्या में काफी कमी आई है।वर्ष 2015 के दौरान आकस्मिक चोटों के कारण 4.13 लाख लोगों की जान चली गई और 1.33 लाख लोगों की आत्महत्या के कारण मृत्यु हो गई।भारत में दिव्यांगों की कुल संख्या 2.68 करोड़ बताई गई है।

Published on:
01 Nov 2019 02:28 pm