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शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है हरे रंग की बोतल का पानी

नीली, आसमानी या बैंगनी रंग की बोतल के प्रयोग से एसिडिटी, अल्सर, ब्लड प्रेशर व पेट संबंधी रोगों में आराम मिलता है
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Mar 22, 2019
green bottle
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है हरे रंग की बोतल का पानी

इलाज के लिए रंगों का प्रयोग प्राचीनकाल से होता आ रहा है और यह आज भी उपयोगी है। विशेषज्ञ के अनुसार नेचुरोपैथी की सूर्य किरण चिकित्सा में लाल, पीले, नारंगी, हरे, बैंगनी, आसमानी और नीले रंग से इलाज किया जाता है।

अलग - अलग इलाज के लिए इन रंगों की कांच की बोतल में पानी भरकर और उसके ऊपर लकड़ी का कॉर्क (ढक्कन) लगाकर सूर्योदय के समय लकड़ी के पटरे पर रख दिया जाता है और सूर्यास्त के समय इस पानी को उठा लिया जाता है। इस पानी को दिन में कभी भी पी सकते हैं। यह प्रयोग कई तरह के रोगों को दूर करता है।

- अगर सर्दी, जुकाम, खांसी और बुखार है तो लाल, पीले व नारंगी रंग की बोतल में पानी भरकर रखें।
- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ानी है तो हरे रंग की बोतल का इस्तेमाल करें।
- नीली, आसमानी या बैंगनी रंग की बोतल के प्रयोग से एसिडिटी, अल्सर, ब्लड प्रेशर व पेट संबंधी रोगों में आराम मिलता है।

Published on:
22 Mar 2019 09:00 am