
घर के बुजुर्ग अक्सर उम्र से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित रहते हैं। उनका तन ही नहीं मन भी सुस्त व परेशान रहने लगता है। ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखकर हम बुजुर्गों उन्हें स्वस्थ और खुश रख सकते हैं।
समय पर दें दवाएं -
ज्यादातर बुजुर्ग क्रॉनिक डिजीज से पीड़ित रहते हैं इसलिए उनके लिए दवाएं नियमित रूप से लेना जरूरी होता है। घर के किसी सदस्य को उन्हें समय से दवा देने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए या उनके मोबाइल पर सारे रिमाइंडर सेट कर देने चाहिए। बेहतर होगा कि सभी दवाओं के अलग-अलग डिब्बे बनाकर उन पर लेने का समय मोटे अक्षरों में लिख दें। संभव हो तो हर हफ्ते डिब्बे में मौजूद दवा की मात्रा लिखकर उतने टिक माक्र्स लगा दें और बुजुर्ग से कहेंं कि दवा लेते ही वे टिक को क्रॉस में बदल दें।
उनके साथ वक्त बिताएं -
उम्रदराज लोग उदास व सुस्त रहने लगते हैं। ऐसे में उनका अकेलापन दूर करने के लिए उनके साथ समय बिताएं। उनसे रिश्तेदारों, मौसम, तबीयत, राजनीति या महंगाई जैसे मुद्दे पर बात करें। उन्हें किसी सामाजिक संस्था या योग सेंटर का सदस्य बनने के लिए भी प्रेरित कर सकते हैं।
स्वाद की संतुष्टि -
अक्सर बुजुर्ग बाजार की चटपटी चीजों की ज्यादा मांग करते हैं। दरअसल होता यह है कि उम्र बढ़ने के साथ उनकी सैलिवरी ग्लैंड्स कम होने लगती हैं और स्वाद ग्रंथियां फूलने लगती हैं, इससे उनका मुंह सूखा व स्वादहीन रहने लगता है। इसलिए अपने स्वाद की संतुष्टि के लिए उनमें ऐसी चीजें खाने की बार-बार तलब उठती है। परिजनों को इसे चटोरेपन से जोड़ने के बजाय सेहत के नजरिये से जोड़कर देखना चाहिए और उन्हें उलाहना देने से बचना चाहिए। झगड़ने की बजाय घर के खाने में उनके लिए थोड़ा अदरक, लहसुन और हरी मिर्च या कालीमिर्च युक्त सब्जी आदि बना दें ताकि उन्हें बाजार की चीजों की याद न आए और न ही उन पर निर्भर होना पड़़े।