
Manoj Bajpayee On Ghooskhor Pandat: मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘गजब रात’ नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने के बाद अपनी रहस्यमयी कहानी और भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर चर्चा में है। रितेश शाह के निर्देशन और नीरज पांडे की कहानी वाली इस क्राइम थ्रिलर में मनोज बाजपेयी ने दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टर अजय निर्वित का किरदार निभाया है। शुरुआत में रिश्वत लेने और अपने फायदे के लिए काम करने वाला अजय एक घायल पत्रकार की जिंदगी बचाने के दौरान ऐसी साजिश में फंस जाता है, जिसमें बड़े राजनीतिक और कारोबारी लोगों के नाम सामने आते हैं।
फिल्म की कहानी दिल्ली के कनॉट प्लेस से शुरू होती है, जहां एक चलती कार से घायल युवती सड़क पर गिर जाती है। पुलिस अधिकारी अजय निर्वित को इस मामले की जिम्मेदारी मिलती है। शुरुआत में उसे युवती के बारे में गलत जानकारी दी जाती है और उसकी पहचान को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं।
जांच के दौरान अजय को पता चलता है कि उस युवती का नाम आर्या सहनी है और वह एक पत्रकार है। आर्या एक बड़ी साजिश की पड़ताल कर रही थी, जिसमें कथित तौर पर दवा कंपनियों और प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से वैक्सीन की नकली कमी पैदा करने की योजना बनाई गई थी। इसका मकसद बाजार में घबराहट फैलाकर कीमतें बढ़ाना और आर्थिक फायदा कमाना था।
आर्या के पास इस साजिश से जुड़े अहम सबूत थे। उसने बातचीत और अन्य जानकारियों को रिकॉर्ड किया था। इन सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए उसने एसडी कार्ड निगल लिया था, ताकि साजिश में शामिल लोग उसे आसानी से हासिल न कर सकें।
आर्या के अपने संपादक ने कथित तौर पर उसके बारे में जानकारी सीबीआई अधिकारी नवीन माधोक तक पहुंचा दी थी। इसके बाद आर्या का अपहरण किया गया और उसे प्रताड़ित किया गया। आरोपियों से बचने के लिए वह चलती कार से कूद गई, लेकिन बाद में कोमा में चली गई। अब कई लोग उस तक पहुंचकर सबूत हासिल करना चाहते हैं।
अजय की जांच में नेता सुनीता चौधरी का नाम सामने आता है, जिसका किरदार दिव्या दत्ता ने निभाया है। वह कथित साजिश से जुड़े सबूतों को सार्वजनिक होने से रोकना चाहती है। अजय की भ्रष्ट छवि का फायदा उठाकर उसे आर्या को मारने के लिए पैसे देने की कोशिश की जाती है।
हालांकि, इस बार अजय अपने पुराने तरीके से अलग फैसला लेने लगता है। उसे एहसास होता है कि आर्या को मारने का मतलब प्रभावशाली लोगों को बच निकलने का मौका देना होगा।
फिल्म के क्लाइमैक्स में अजय सुनीता के सामने शर्त रखता है। वह धमकी देता है कि अगर आर्या को उचित इलाज नहीं मिला और सुनीता ने अपने राजनीतिक पद से इस्तीफा नहीं दिया, तो वह साजिश से जुड़े सबूत सार्वजनिक कर देगा।
आखिरकार सुनीता उसकी शर्तें मान लेती है। आर्या को इलाज के लिए सिंगापुर भेजने की व्यवस्था होती है, जिससे उसके बचने की उम्मीद बनी रहती है। सुनीता भी अपने पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हो जाती है।
फिल्म का अंत पूरी तरह न्याय मिलने की कहानी नहीं है। अजय आर्या की जान बचाने में मदद करता है, लेकिन साजिश में शामिल सभी प्रभावशाली लोगों को बेनकाब नहीं करता। वह पहले आर्या की सुरक्षा और इलाज को प्राथमिकता देता है।
यही अजय के किरदार में बदलाव भी दिखाता है। पूरी कहानी में अपने फायदे के लिए काम करने वाला पुलिस अधिकारी आखिरकार एक ऐसी लड़की की रक्षा करने का फैसला करता है, जिसे बचाने से उसकी अपनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। फिल्म का अंत इस सवाल को खुला छोड़ता है कि क्या किसी की जान बचाना पर्याप्त है, जब पूरी व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार को उजागर करना अभी बाकी हो।