बूंदी

जलीय जीवों का गला घोंट रही है जलकुंभी

रामगढ-विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में बहने वाली सदानीरा चंबल नदी का पानी इन दिनों जलकुंभी से अट गया है। बहते पानी के साथ यह विदेशी अवांछित जल वनस्पति जलीय जीवों के साथ-साथ नदी किनारे रहने वाले लोगों व जीवों के लिए भी परेशानी का सबब बन गई है।

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Feb 13, 2024
जलीय जीवों का गला घोंट रही है जलकुंभी

जलीय जीवों का गला घोंट रही है जलकुंभी
बूंदी. रामगढ-विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में बहने वाली सदानीरा चंबल नदी का पानी इन दिनों जलकुंभी से अट गया है। बहते पानी के साथ यह विदेशी अवांछित जल वनस्पति जलीय जीवों के साथ-साथ नदी किनारे रहने वाले लोगों व जीवों के लिए भी परेशानी का सबब बन गई है।

चंबल की डाउन स्ट्रीम से इसकी शुरूआत होकर राजस्थान में बहने वाले चंबल के लगभग पूरे क्षेत्र में पानी के बहाव के साथ फेलती जा ही है। कोटा महानगर सहित अन्य गांव-कस्बों से नदी में मिलने वाले गंदे नाले इस वनस्पति के पोषक बन रहे हैं। जल गोभी, नील गोभी, उष्णकटिबंधीय बत्तख, जल सलाद ओर जल कुंभी आदि नामों से पहचानी जाने वाली इस वनस्पति के कारण पानी में सूर्य की किरणें वहीं पहुंच पाती तथा पानी का ऑक्सीजन स्तर कम हो जाता है। जिससे जलीय जीवों और मछलियों का दम घुटता है तथा कई बार उनकी मौत भी हो जाती है।

बूंदी जिले के प्राकृतिक जामुनियां द्वीप पर छायी वनस्पति से यहां रहने वाले मगरमच्छ भी हरे रंग में रंगे नजर आने लगे हैं। आसपास के ग्रामीणों ने नदी में स्नान करना बंद कर दिया है। क्योंकि जलकुंभी के बीच नहाने से खुजली चलने लगती है। नदी में जलीय पक्षियों के स्वच्छंद विचरण व जलक्रीड़ा पर भी इस वनस्पति ने ग्रहण लगा दिया है। वन्यजीव संरक्षणकर्ताओं ने स्वच्छ बहते जल वाली चंबल नदी में जलकुंभी के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त की है।

पर्यावरणविद् नरेंद्र पाटिल ने चंबल में बढ़ती अवांछित वनस्पति को नदियों के स्वरूप पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाला बताते हुए इसके समाधान की कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता बताई। घड़ियाल संरक्षण से जुड़े हरिराम मीणा ने बताया कि इससे घड़ियालों के साथ कछुओं व अन्य जलीय जीव भी प्रभावित हो रहे हैं।

Published on:
13 Feb 2024 08:22 pm
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