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Iran Currency Crisis: 1 डॉलर में 20 लाख ईरानी रियाल, जानिए कैसे गिर रही ईरान की इकोनॉमी, लगभग रुक गया तेल का एक्सपोर्ट

US Iran Sanctions: ईरानी रियाल सोमवार को डॉलर के मुकाबले गिरकर 20.2 लाख रियाल प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। अमेरिका नई आर्थिक पाबंदियां लगाने की तैयारी में है, जिसे अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने “Economic D-Day” बताया है।
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Aug 24, 2026
Iranian Rial vs Dollar
ईरानी रियाल काफी ज्यादा गिर गया है। (PC: AI)

Iranian Rial Vs Dollar: ईरान की अर्थव्यवस्था पर संकट गहराता जा रहा है। सोमवार, 24 अगस्त को ईरानी रियाल डॉलर के मुकाबले गिरकर 20.2 लाख रियाल प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इसी बीच अमेरिका ईरान पर नए और कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इसे “Economic D-Day” बताया है। रियाल में यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब ईरान पहले से ही महंगाई, कमजोर आर्थिक वृद्धि, प्रतिबंधों और युद्ध के दबाव से जूझ रहा है। नई अमेरिकी कार्रवाई से हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

आयातित सामान हुआ बहुत महंगा

ईरान के अनौपचारिक मुद्रा बाजार में सोमवार को एक डॉलर की कीमत करीब 20.2 लाख रियाल पर पहुंच गई। वहीं, ईरान के केंद्रीय बैंक की आधिकारिक दर करीब 15 लाख रियाल प्रति डॉलर है। हालांकि, आम ईरानी नागरिकों के लिए अनौपचारिक बाजार की दर ज्यादा मायने रखती है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रैकिंग वेबसाइट Bonbast के आंकड़ों में सोमवार को रियाल करीब 4.5 फीसदी कमजोर हुआ। यह डॉलर के मुकाबले ईरानी करेंसी का अब तक का सबसे निचला स्तर है। यानी बात सिर्फ आंकड़ों की नहीं है। रियाल जितना कमजोर होगा, विदेश से आने वाला सामान उतना ही महंगा पड़ेगा। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।

अमेरिका की नई कार्रवाई से बढ़ी टेंशन

अमेरिका ईरान पर नए प्रतिबंधों की घोषणा करने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने फाइनेंशियल टाइम्स में लिखे एक लेख में कहा कि वॉशिंगटन ईरान की अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले रास्तों को बंद करने की कोशिश करेगा। उन्होंने आने वाली कार्रवाई को “Economic D-Day” करार दिया है। अमेरिका का लक्ष्य ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और उसके व्यापारिक व वित्तीय रास्तों को सीमित करना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नई कार्रवाई का असर ईरान के साथ कारोबार करने वाले दूसरे देशों और कंपनियों पर भी पड़ सकता है।

लगभग रुक गया है ईरान का तेल एक्सपोर्ट

ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से मुश्किल दौर से गुजर रही है। देश में महंगाई डबल डिजिट में है और इकोनॉमिक ग्रोथ कमजोर बनी हुई है। अमेरिका और इजरायल के साथ करीब छह महीने से चल रहे युद्ध ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती ने पिछले सप्ताह कहा था कि देश का कच्चे तेल का निर्यात लगभग रुक गया है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात ने भी पिछले सप्ताह ईरान के साथ सभी वित्तीय लेनदेन अगले आदेश तक रोक दिए थे। UAE ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। तेल निर्यात में गिरावट और विदेशी मुद्रा की कमी ने रियाल पर दबाव और बढ़ा दिया है। दूसरी तरफ आयात की मांग और महंगाई की उम्मीद बढ़ने से भी मुद्रा पर दबाव बना हुआ है।

होर्मुज स्ट्रेट पर भी दुनिया की नजर

ईरान के आर्थिक संकट का असर सिर्फ देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है। दुनिया की नजर रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट पर भी है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। युद्ध और तनाव के बीच यहां से होने वाली शिपिंग प्रभावित हुई है। ईरान अब भी इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाए हुए है, जबकि अमेरिका की ओर से नौसैनिक नाकाबंदी लागू है। अगर तनाव और बढ़ता है और तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों से लेकर दुनिया के कई देशों में महंगाई के रूप में देखने को मिल सकता है।

चीन की तरफ बढ़ेगा ईरान का रुख

अमेरिकी दबाव के बीच ईरान अब चीन के साथ अपने कारोबारी रिश्ते और मजबूत करने की तैयारी में है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को कहा कि तेहरान अमेरिकी दबाव का सामना करने के लिए चीन के करीबी देशों के साथ व्यापार बढ़ाने पर जोर देगा। उन्होंने कहा कि ईरान शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO और BRICS जैसे मंचों का इस्तेमाल करके अमेरिकी दबाव का मुकाबला करना चाहता है। ईरान इन संगठनों को वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में संतुलन बनाने के अहम साधन के रूप में देखता है। चीन ईरान का बड़ा तेल खरीदार है। बीजिंग पहले ही कह चुका है कि अमेरिकी आर्थिक दबाव समस्या का समाधान नहीं है और युद्ध का हल बातचीत के जरिए निकाला जाना चाहिए। फिलहाल ईरानी रियाल की लगातार गिरती कीमत और अमेरिका की नई पाबंदियों ने तेहरान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

Updated on:
24 Aug 2026 04:32 pm
Published on:
24 Aug 2026 04:32 pm