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Sugar Price Today: ISMA ने कहा- देश में नहीं है चीनी का संकट, जल्द घटना शुरू हो सकते हैं दाम

Sugar Price Prediction: चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच ISMA ने राहत की उम्मीद जताई है। संगठन के मुताबिक अगले सात दिनों में दाम नरम पड़ सकते हैं। इसके मुताबिक देश में चीनी की कमी नहीं है।
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भारत

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Pawan Jayaswal

Aug 24, 2026

Sugar Price News

चीनी की कीमतों में जल्द कमी आ सकती है। (Photo Source: AI Image)

Sugar Price News: चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर आ सकती है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) का कहना है कि अगले सात दिनों में चीनी के दाम नरम पड़ना शुरू हो सकते हैं। संगठन ने कहा कि देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है। ISMA के मुताबिक मौजूदा तेजी का बड़ा कारण सप्लाई की कमी नहीं, बल्कि त्योहारी मांग, बाजार की धारणा और थोक खरीदारों की तरफ से ज्यादा खरीदारी है। यानी बाजार में जितनी चीनी उपलब्ध है, उस आधार पर स्थिति उतनी खराब नहीं है, जितनी हाल की कीमतों से लग रही है।

कितने बढ़े चीनी के भाव

ISMA के अनुसार चीनी की कीमत करीब 42 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 55 रुपये तक पहुंच गई है। संगठन ने इस तेजी को करीब 16 फीसदी बताया है। हालांकि, उसका कहना है कि इसे देश में चीनी की कमी से जोड़ना सही नहीं होगा। संगठन ने कहा कि मौसम का असर गन्ने की पैदावार पर पड़ा है। इसके अलावा महाराष्ट्र में हाई क्रशिंग रेट और उत्तर प्रदेश में गन्ने की कुछ किस्मों से जुड़े मुद्दों ने भी बाजार को प्रभावित किया है। लेकिन इन वजहों के बावजूद देश में कुल चीनी उपलब्धता को लेकर चिंता की कोई बड़ी वजह नहीं है।

एथेनॉल नहीं है कीमतों में तेजी के लिए जिम्मेदार

चीनी की कीमत बढ़ने के बीच एथेनॉल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ISMA ने कहा है कि मौजूदा तेजी के लिए एथेनॉल को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है। एसोसिएशन के मुताबिक चीनी बाजार में अभी जो हलचल है, उसके पीछे कई वजहें एक साथ काम कर रही हैं। इसमें त्योहारी सीजन की मांग, थोक खरीद और बाजार में बनी तेजी की धारणा प्रमुख है।

फेस्टिव डिमांड और थोक खरीद ने बिगाड़ा संतुलन

ISMA के चेयरमैन नीरज शिरगांवकर ने कहा कि त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ चीनी की मांग में तेजी आई है। दूसरी ओर ब्राजील में सप्लाई से जुड़ी स्थिति ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। लेकिन मौजूदा तेजी में सबसे बड़ी भूमिका अटकलों की है। संगठन का कहना है कि थोक खरीदारों ने जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करना शुरू कर दिया है। इससे बाजार में रोजमर्रा के कारोबार के लिए उपलब्ध चीनी की मात्रा कम दिखाई देने लगी है। यही स्थिति कृत्रिम कमी जैसा माहौल बना रही है। मांग बढ़ी, थोक खरीदारी बढ़ी और बाजार में तेजी की धारणा मजबूत होती गई। नतीजा, चीनी के दाम ऊपर चले गए।

अगले 7 दिन में बदल सकता है बाजार का मूड

ISMA को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बाजार का माहौल सुधरेगा। संगठन के मुताबिक अगले सात दिनों में चीनी की कीमतों में नरमी की शुरुआत हो सकती है। यानी अभी महंगी चीनी खरीद रहे लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक कीमत कितनी नीचे आती है, यह मांग और बाजार में सप्लाई की स्थिति पर निर्भर करेगा।

अगले साल की शुरुआत में भी पर्याप्त स्टॉक

चीनी की उपलब्धता को लेकर ISMA ने एक और अहम आंकड़ा दिया है। संगठन के मुताबिक अगले साल की शुरुआत में करीब 35 लाख टन चीनी का शुरुआती स्टॉक रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा बताता है कि देश में सप्लाई की स्थिति आरामदायक है। ऐसे में मौजूदा कीमतों में तेजी को सिर्फ चीनी की कमी का नतीजा मानना सही नहीं होगा। फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि त्योहारी मांग कितनी बनी रहती है और थोक खरीदारों की स्टॉकिंग कब कम होती है। अगर बाजार में यह दबाव घटता है तो चीनी के दाम भी जल्द नीचे आ सकते हैं।