
क्विक कॉमर्स से सामान मंगाने वाले ग्राहकों को जल्द ही उत्पादों से जुड़ी ज्यादा जानकारी मिल सकती है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) क्विक कॉमर्स कंपनियों के लिए नियमों में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित नियमों के तहत उत्पाद की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट के साथ रिफंड पॉलिसी और शिकायत दर्ज कराने की जानकारी भी साफ-साफ देनी पड़ सकती है। जी बिजनेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नए नियमों का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जल्द जारी हो सकता है। इससे क्विक कॉमर्स कंपनियां खाद्य सुरक्षा नियामक के निर्देशों के दायरे में आएंगी। हालांकि, अभी तक इन नियमों को लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
प्रस्तावित बदलावों का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन सामान खरीदने वाले ग्राहकों को उत्पाद की सही और पूरी जानकारी देना है। इसके तहत मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और सामग्री यानी इंग्रीडिएंट्स की जानकारी स्पष्ट रूप से दिखानी पड़ सकती है। इससे ग्राहकों को सामान खरीदने से पहले यह पता लगाने में आसानी होगी कि उत्पाद कब बना है और उसे कब तक इस्तेमाल किया जा सकता है। क्विक कॉमर्स कंपनियों को रिफंड पॉलिसी, शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया और दूसरी जरूरी शर्तों की जानकारी भी स्पष्ट रूप से देनी पड़ सकती है। इससे खराब या गलत सामान मिलने पर ग्राहकों को अपना पैसा वापस पाने या शिकायत दर्ज कराने में आसानी हो सकती है।
FSSAI के प्रस्तावित बदलावों में पैकेट के सामने चेतावनी वाले लेबल लगाने का मुद्दा भी शामिल है। इसमें रेड हेक्सागन वॉर्निंग जैसे संकेतों पर विचार किया जा रहा है। इसका मकसद उन खाद्य उत्पादों के बारे में ग्राहकों को पहले से सचेत करना है, जिनमें चीनी, नमक या फैट की मात्रा ज्यादा होती है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन बदलावों को एक ही चरण में लागू किया जा सकता है। हालांकि, चेतावनी वाले लेबल का अंतिम स्वरूप और नियम लागू होने की तारीख आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी होने और जरूरी नियामकीय निर्देश आने के बाद नए नियमों को नए साल की शुरुआत से लागू किया जा सकता है। फिलहाल इसे संभावित समयसीमा के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो क्विक कॉमर्स कंपनियों को अपने ऐप पर उत्पादों की जानकारी दिखाने के तरीके में बदलाव करना पड़ सकता है।
भारत में क्विक कॉमर्स का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। गूगल और रेडसीयर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में यह बाजार करीब 13 अरब डॉलर का था। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2030-31 तक इसका आकार बढ़कर 90 अरब डॉलर हो सकता है।