घट जाएगी इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत नीति आयोग का दावा
नई दिल्ली: इलेक्ट्रिक वाहन ऑटोमोबाइल सेक्टर का फ्यूचर हैं। हमारी सरकार इन वाहनों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है लेकिन हमारे यहां सरकार के प्रोत्साहन के बावजूद लोगों ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कोई उत्साह नहीं दिख रहा । इसकी सबसे बड़ी वजह हमारे देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी माना जा रहा है। इसके सिवाय जो दूसरा फैक्टर इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रभावित करता है वो है इनकी कीमत। दरअसल महंगे होने के कारण लोग इन्हें खरीदने में संकोच करते हैं । लेकिन अब ऐसा नहीं होगा दरअसल नीति आयोग का मानना है कि अगले तीन-चार वर्षों में ई-कारों की लागत पेट्रोल और डीजल इंजन वाली कार के बराबर हो जाएगी।
आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने बुधवार को कहा कि भारत को पारंपरिक ईंधन की जगह ई-वाहन की ओर बढ़ने के लिए तैयार रहना चाहिए। अगले कुछ वर्षों में ई-वाहन काफी सस्ते हो जाएंगे। आयोग इन कारों में लगने वाली बैट्रियों के सस्ते होने पर इन कारों की लागत कम हो जाएगी और इनकी कीमत पारंपरिक गाड़ियों के बराबर हो जाएगी।
अभी महंगी हैं कारें-
आपको बता दें कि हाल के दिनों में देश में कई इलेक्ट्रिक कारें लॉन्च हुई हैं। इन कारों की कीमत नार्मल कारों से ज्यादा है। आपको बता दें कि हुंडई की कोना ई-कार की कीमत 23.72 लाख रुपये से शुरू है, जबकि महिंद्रा की ई-वेरिटो की शुरुआती कीमत 13.17 लाख रुपये है। इसके अलावा टाटा ने टिगोर लांच की जिसकी कीमत 9.17 लाख रुपये और महिंद्रा की ई20 प्लस 6.07 लाख रुपये से शुरू हो रही है। इसके अलावा बीएमडब्ल्यू, ऑडी, एमजी मोटर्स भी ई-कार लांच कर रहे हैं।