एग्रीकल्चर साइंस और संबंधित कोर्स करने के बाद कई प्राइवेट और सरकारी संस्थानों को ऐसे प्रोफेशनल्स की जरूरत होती है जो मिट्टी से लेकर पेड़ की पत्ती को देखकर गुणवत्ता बता सके।
जरूरी नहीं है कि जिनके परिवार की पृष्ठभूमि खेती-किसानी से जुड़ी है वे ही एग्रीकल्चर या खेती-बाड़ी के बारे में सोच सकते हैं। ऐसे व्यक्ति जो इस क्षेत्र में रुचि रखते हैं वे इसमें ग्रेजुएशन से लेकर डॉक्टोरल डिग्री के साथ रिसर्च का काम भी कर सकते हैं। जानते हैं इसके बारे में-
योग्यता : कैंडिडेट को जमीन से जुड़ी जानकारी होने के साथ रुचि और इस क्षेत्र से संबंधित एकडेमिक क्वालिफिकेशन होनी चाहिए।
रोजगार के अवसर : संबंधित विषय में शिक्षा प्राप्त करने के बाद आप एक पर्यवेक्षक, शिक्षक, वैज्ञानिक, वितरक, शोधकर्ता आदि के रूप में भी काम कर सकते हैं।
यहां कर सकते हैं
पढ़ाई व शोधकार्य:
• केन्द्रीय कपास अनुसंधान संस्थान, नागपुर
• केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद
• भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, रांची
• भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली
संबंधित कोर्स :
एग्रीकल्चर साइंस और संबंधित कोर्स करने के बाद कई प्राइवेट और सरकारी संस्थानों को ऐसे प्रोफेशनल्स की जरूरत होती है जो मिट्टी से लेकर पेड़ की पत्ती को देखकर गुणवत्ता बता सके। कुछ खास कोर्स किए जा सकते हैं-
बैचलर्स : बीएससी इन एग्रीकल्चर, क्रॉप साइकोलॉजी, प्लांट साइंस, डेयरी साइंस, पॉल्ट्री आदि।
मास्टर्स : एमएससी इन एग्रीकल्चर, बायोलॉजिकल साइंस और एग्रीकल्चर बॉटनी आदि।
डॉक्टोरेट : डॉक्टर ऑफ फिलोसॉफी इन एग्रीकल्चर बायोटेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर एंटोमोलॉजी आदि।