छतरपुर

70 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी विश्वविद्यालय को नहीं मिला एक भी भवन, कागजों में तैयार लेकिन धरातल पर अधूरा पड़ा एमसीबीयू का नया कैंपस

अकादमिक-प्रशासनिक ब्लॉक से लेकर कुलपति निवास में काम बाकी, रास्ते में कच्ची सडक़ बनी शिक्षकों और छात्रों के लिए बड़ा रोड़ा
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Aug 26, 2026
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यूनिवर्सिटी

महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के गौरैया रोड स्थित नए परिसर में करीब 70 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि खर्च किए जाने के बावजूद अब तक एक भी भवन विश्वविद्यालय प्रशासन को हैंडओवर नहीं हो सका है। निर्माण कार्यों की तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी काम अधूरा पड़ा है, जिससे नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की कक्षाएं नए कैंपस में शुरू करने का लक्ष्य पिछड़ता नजर आ रहा है।

वर्ष 2023 में आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान राज्य के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने इस नए परिसर के निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया था। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार पहले चरण में करीब 150 करोड़ रुपए का विकास प्रस्तावित है, जिसमें से सूचना केंद्र, अकादमिक भवन और अन्य बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं।

भवनों की स्थिति और काम में रुकावट

वर्तमान में अकादमिक-प्रशासनिक ब्लॉक और कुलपति निवास का निर्माण बाहर से पूरा नजर आ रहा है, लेकिन भीतर बिजली का कार्य, फर्नीचर शिफ्टिंग और अंतिम फिनिशिंग का काम अब भी बाकी है। स्थिति यह है कि परिसर में निर्माण कार्य रुक-रुक कर चल रहा है, जिसके कारण भवनों का हैंडओवर पिछले 6 महीने से लगातार टल रहा है।

नए परिसर के गेट तक पक्की सडक़ नहीं

नए परिसर तक पहुंचने के लिए अभी आवागमन का कोई सुगम मार्ग तैयार नहीं हुआ है। सटई रोड और सागर रोड की ओर से बनने वाले मुख्य प्रवेश द्वारों से लेकर भवनों तक डामर या सीसी रोड का निर्माण नहीं कराया गया है। केवल कच्चे रास्ते ही मौजूद हैं, जिसके कारण बारिश के मौसम में परिसर तक पहुंचना बेहद कठिन हो रहा है। यदि पक्की सडक़ का निर्माण पूरा होने से पहले कक्षाएं शुरू की जाती हैं, तो विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

यूटीडी में जगह का अभाव, प्रभावित हो रही पढ़ाई

वर्तमान में विश्वविद्यालय के यूटीडी परिसर में विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ प्रशासनिक विभाग भी संचालित हो रहे हैं। एक ही भवन में दोनों व्यवस्थाएं चलने के कारण छात्रों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। प्रायोगिक विषयों की कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और अन्य गतिविधियों के लिए स्थान की कमी बनी हुई है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था और शैक्षणिक स्तर प्रभावित हो रहा है।

418 एकड़ परिसर को विकसित करने की योजना सुस्त

विश्वविद्यालय के 418 एकड़ परिसर को चरणबद्ध तरीके से आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का मास्टर प्लान बनाया गया था।

मुख्य द्वार व प्रतिमा- सटई रोड स्थित मुख्य प्रवेश द्वार पर सबसे पहले सूचना केंद्र बनाया जाएगा और आगे चौक पर महाराजा छत्रसाल की अश्वारूढ़ प्रतिमा स्थापित होगी।प्रशासकीय व अकादमिक क्षेत्र- प्रतिमा के बाईं ओर कुलपति और कुलसचिव के आवास तथा दाईं ओर दो प्रशासनिक भवन बनाए जाने हैं।

ऑडिटोरियम व खेल परिसर- प्रशासनिक ब्लॉक के पास एक इनडोर और एक आउटडोर ऑडिटोरियम, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, तालाब के पास स्टेडियम और लाइब्रेरी विकसित की जाएगी।आवास व हॉस्टल- प्रतिमा चौक से सीधे आगे टीचिंग ब्लॉक, इसके आगे छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग हॉस्टल तथा अंत में अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए आवासीय क्वार्टर का निर्माण प्रस्तावित है।हालांकि, निर्माण कार्य की अत्यंत धीमी गति के कारण विश्वविद्यालय के ये सभी बड़े प्रोजेक्ट समय से पिछड़ रहे हैं।

जिम्मेदारों का क्या है कहना

यूनिवर्सिटी के नए परिसर में एक भवन पीआईयू और दूसरा भवन बीडीसी के देखरेख में बनाया जा रहा है। भवनों में कुछ काम अभी शेष है। जैसे ही काम पूरी तरह से कंप्लीट होता है, भवन का उपयोग शैक्षणिक गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा।

यशवंत सिंह पटेल, कुलसचिव, एमसीबीयू

Updated on:
26 Aug 2026 10:18 am
Published on:
26 Aug 2026 10:18 am