छतरपुर

छतरपुर में सात दिवसीय विरासत कला उत्सव का शुभारंभ, पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया के कबीर भजन ने मंत्रमुग्ध किया

Jan 29, 2026
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प्रस्तुति देते हुए

उत्तर मध्य सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज और जिला प्रशासन छतरपुर के संयुक्त तत्वावधान में शहर के ऑडिटोरियम में सात दिवसीय विरासत कला उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। पहले दिन पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया और उनके साथियों ने कबीर गायन प्रस्तुत किया, जिससे दर्शक भावविभोर हो गए। कार्यक्रम का शुभारंभ कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इस अवसर पर नपाध्यक्ष ज्योति चौरसिया, एसपी अगम जैन, सीईओ जिला पंचायत नमः शिवाय अरजरिया, सीएमओ नपा माधुरी शर्मा सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

लोकगायक और कबीरपंथी

पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया भारत के प्रसिद्ध लोकगायक और कबीरपंथी संत हैं। उन्होंने कबीर के निर्गुण भजनों को मालवी लोकधुनों और खड़ताल, झांझ, मंजीरा, ढोलक, हारमोनियम जैसे वाद्ययंत्रों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया। उनका गायन केवल संगीत नहीं, बल्कि आत्मा की पुकार और सामाजिक चेतना का संदेश भी है। टिपानिया का जन्म 7 सितम्बर 1954 को मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के लूणियाखेड़ी गाँव में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा अपने गाँव के विद्यालय में प्राप्त की और संगीत और अध्यात्म में रुचि रखते हुए शिक्षक के रूप में भी कार्य किया। उनकी भजन यात्रा 1978 से शुरू हुई और उन्होंने कबीर, दादू, रमाई सहित अन्य संतों के पदों को प्रस्तुत किया। उनके भजनों में भक्ति के साथ सामाजिक समरसता और सांप्रदायिक सौहार्द की झलक मिलती है।

विदेशों में प्रस्तुतियां

टिपानिया ने भारत और विदेशों में अपनी प्रस्तुतियाँ दी हैं। उन्होंने अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, पाकिस्तान, यूएई, भूटान और नेपाल में कबीर के संदेश को पहुंचाया। अमेरिका के लगभग 40 विश्वविद्यालयों में उन्होंने कबीर पर व्याख्यान और प्रस्तुतियां दी हैं। उन्हें पद्मश्री सम्मान, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, कबीर सम्मान और राष्ट्रीय कबीर समारोह में विशेष सम्मान प्राप्त हैं। उन्होंने समाज में जाति, धर्म और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और कबीर की वाणी जाति न पूछो साधु की का जीता-जागता उदाहरण प्रस्तुत किया।

नाटक संत तुकाराम का मंचन आज

उनके साथ अजय टिपानिया ढोलक और सह गायन, देवनारायण सरोलिया वायलिन और सह गायन, धर्मेंद्र टिपानिया हारमोनियम और सह गायन, मयंक टिपानिया मंजीरा और सह गायन में शामिल रहे। आज विरासत के मंच पर मध्यप्रदेश के वरिष्ठ रंगकर्मी और फिल्म कलाकार संजय मेहता का नाटक संत तुकाराम प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें संजय मेहता स्वयं अभिनय करेंगे।

Updated on:
29 Jan 2026 10:45 am
Published on:
29 Jan 2026 10:45 am
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