
राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 की सियासी सरगर्मियों के बीच चूरू जिले की राजनीति से एक दिलचस्प और बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ की अगली पीढ़ी ने आधिकारिक तौर पर चुनावी राजनीति में अपना पहला कदम रख दिया है। चूरू जिला परिषद सदस्य पद के लिए राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ और उनकी बहू कनिका सिंह राठौड़ दोनों एक साथ मैदान में उतरे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने पति-पत्नी दोनों को अलग-अलग वार्डों से उम्मीदवार बनाया है, जिसके बाद चूरू के स्थानीय राजनीतिक गलियारों में राठौड़ परिवार की इस नई चुनावी पारी को लेकर काफी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद दोनों प्रत्याशी अब अपने-अपने वार्डों के ग्रामीण अंचलों में जनता का आशीर्वाद लेने और जनसंपर्क अभियान में जुट गए हैं। जिला परिषद के वार्ड नंबर 23 से कनिका सिंह राठौड़ और वार्ड नंबर 39 से पराक्रम सिंह राठौड़ ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में अपनी दावेदारी पेश की है। चुनावी मैदान में उतरने के बाद दोनों नेताओं ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी प्राथमिकताएं और पिता राजेंद्र राठौड़ के चार दशकों के राजनीतिक सफर की प्रेरणा को साझा किया है।
वार्ड नंबर 39 से बीजेपी प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल करने के बाद पराक्रम सिंह राठौड़ ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके पिता राजेंद्र राठौड़ ने लगभग 40 सालों तक चूरू की जनता को अपने खुद के परिवार की तरह माना है और चौबीसों घंटे खुद को जनसेवा के लिए समर्पित रखा है। पराक्रम ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में अपने पिता से ही प्रेरणा ली है और जो कुछ भी सीखा है, उन्हीं के मार्गदर्शन में सीखा है।
पराक्रम सिंह ने आगे कहा कि अपने पिता के उसी सेवा भाव से प्रेरित होकर ही वे और उनकी पत्नी पहली बार चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम दोनों का एकमात्र लक्ष्य जनता की सेवा करना है। पार्टी ने हम दोनों पर जो भरोसा और विश्वास जताया है, उस पर हम पूरी तरह खरे उतरेंगे। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि चूरू की जनता के आशीर्वाद से वे दोनों वार्डों में भारी और निर्णायक बहुमत के साथ जीत हासिल करेंगे।
वहीं वार्ड नंबर 23 से बीजेपी प्रत्याशी और पराक्रम सिंह की पत्नी कनिका सिंह राठौड़ ने अपने चुनावी विजन और पारिवारिक विरासत को लेकर बेहद भावुक बात कही। कनिका सिंह ने बताया कि जब उन्होंने कल गांवों का दौरा किया, तो उन्होंने देखा कि साफ पानी, बिजली और अन्य बुनियादी जरूरतें ही ग्रामीणों की सबसे पहली मांग हैं। उनकी प्राथमिकता सबसे पहले गांवों की नींव को मजबूत करने की होगी, क्योंकि मजबूत बुनियादी ढांचे पर ही विकास की बड़ी इमारत खड़ी की जा सकती है।
अपने ससुर राजेंद्र राठौड़ का जिक्र करते हुए कनिका सिंह ने कहा कि 40 साल तक निस्वार्थ भाव से जनता की सेवा करना एक बहुत बड़ी बात होती है। उन्होंने कहा, "मैंने खुद देखा है कि ससुर जी सुबह 5:30 बजे से ही घर के बाहर बैठकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं। मुझे नहीं लगता कि पूरे जिले में कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसका फोन कॉल उन्होंने कभी अटेंड न किया हो। जब मैं गांव में गई, तो लोगों ने खुद मुझसे कहा कि वे चाहे रात 2 बजे फोन करें या 4 बजे, राठौड़ साहब हमेशा खुद फोन उठाते हैं।" कनिका ने कहा कि लोगों के इस अपार प्यार और भरोसे के कारण उन पर एक बहुत बड़ी नैतिक जिम्मेदारी आ गई है, जो उनके लिए एक भावुक पल है।
वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ राजस्थान की राजनीति में एक बेहद बड़ा नाम रहे हैं और वे कई बार विधायक तथा राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। ऐसे में उनके बेटे पराक्रम सिंह और बहू कनिका सिंह का एक साथ स्थानीय निकाय चुनाव में उतरना जिले की भावी राजनीति का एक नया संकेत माना जा रहा है।
कनिका सिंह ने अपने संबोधन में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण इलाकों में छोटे व्यवसायों से जुड़ी महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात भी कही है। जिला परिषद के दोनों वार्डों में प्रत्याशियों के नाम फाइनल होने के बाद अब चूरू के ग्रामीण इलाकों में चुनावी चौपालें सजने लगी हैं, जहां राठौड़ परिवार की नई पीढ़ी के इस राजनीतिक पदार्पण की पुरजोर चर्चा हो रही है।