
कोयम्बत्तूर. मैसेंजिंग एप- व्हाट्सएपWhatsApp पर पाकिस्तान Pakistan से चल रहे एक ग्रुप WhatsApp Group से जुड़े होने के कारण पुलिस की विशेष खुफिया शाखा (एसआईसी) ने तीन युवकों से पूछताछ की। हालांकि, लंबी पूछताछ के बाद पुलिस ने तीनों संदिग्ध युवकों को छोड़ दिया लेकिन मामले की जांच के लिए उनके मोबाइल फोन Mobile Phone रख लिए। पुलिस के मुताबिक तीनों पश्चिम बंगाल West Bengal के रहने वाले हैं और शहर में आभूषण बनाने वाले एक कारखाने में काम करते हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक तीनों युवकों को दो दिन पहले गुप्त सूचना केे आधार पर पूछताछ के लिए एसआईसी ने हिरासत में लिया था। पुलिस को सूचना मिली थी कि तीनों बांग्लादेश Bangladesh के रहने वाले हैं और व्हाट्सएप पर पाकिस्तान मुजाहिद्दीन mujahideen के नाम से चलने वाले एक ग्रुप से जुड़े हैं, जिसका एडमिन पाकिस्तान से है। इसके बाद पुलिस ने युवकों में हिरासत में लिया लेकिन पूछताछ के दौरान को कोई ठोस सुराग नहीं मिलने के कारण उन्हें शनिवार शाम छोड़ दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक फारुक नाम के एक युवक ने अपना मोबाइल फोन ठीक करने के लिए एक दुकान पर दिया था। वह दो दिन तक फोन लेने नहीं आया तो दुकानदार को संदेह हुआ। उसने फोन खोलकर देखा तो व्हाट्सएप में पाकिस्तान मुजाहिद्दीन नाम का ग्रुप दिखा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस ग्रुप के सदस्य बंदूक और विस्फोटकों के बारे में बातें करते थे। दुकानदार ने इस बात की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने फारुक को हिरासत में लेकर पूछताछ की। बाद में पुलिस और एसआईसी ने फारुक के दो अन्य साथियों को भी हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की। हालांकि, पुलिस व्हाट्सएप ग्रुप से एडमिन के बारे में कोई दस्तावेज या जानकारी हासिल नहीं कर पाई। पुलिस को शुरू में जानकारी मिली थी कि तीनों संदिग्ध बांग्लादेशी हैं। हालांकि, पुलिस ने जब तीनों के कमरों की तलाशी ली तो उस दौरान बरामद आधार कार्ड aadhar card से मालूम चला कि वे तीनों पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं। एसआईसी के अधिकारियों ने पश्चिम बंगाल पुलिस से पड़ताल की तो तीनों संदिग्धों के वहां के निवासी होने की पुष्टि हुई। कोई ठोस दस्तावेज या जानकारी नहीं मिलने के कारण पुलिस ने तीनों को पूछताछ के बाद सशर्त छोड़ दिया। तीनों को पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।