रिटायरमेंट के बाद सत्ता और ओहदे का रुतबा भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन सियासी गलियारों में एक पूर्व अफसर का नया ड्रामा चर्चा का विषय बन गया है। बेटे-बहू से नाराज इस पूर्व अफसर ने उन्हें फंसाने के इरादे से व्हीलचेयर पर बैठकर गुहार लगाने का अनोखा नाटक किया।
देहरादून में एक सेवानिवृत्त अधिकारी के बेटे-बहू के खिलाफ दायर भरण-पोषण का केस खारिज हो गया है। आमतौर पर ऐसे मामलों में माता-पिता के पक्ष में फैसला आता है, लेकिन यहां डीएम कोर्ट ने शिकायतकर्ता के आरोप झूठे पाए।
जुलाई में एक सेवानिवृत्त अधिकारी व्हीलचेयर पर बैठकर डीएम के जनता दरबार में पहुंचे। उन्होंने अपनी झूठी कहानी सुनाई कि उनके बेटे-बहू उनसे मारपीट करते हैं और उन्हें प्रताड़ित करते हैं। डीएम ने बुजुर्ग की हालत देखकर तुरंत मामले का संज्ञान लिया और फास्ट-ट्रैक सुनवाई शुरू की।
लेकिन, जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पता चला कि अधिकारी पूरी तरह से चलने-फिरने में सक्षम हैं। वह अपनी कार से कार्यालय तक आए थे और फिर व्हीलचेयर पर बैठकर डीएम के सामने पेश हुए ताकि उनकी झूठी कहानी सही लगे।
जांच में यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता पति-पत्नी की कुल आय 55,000 रुपये है। इसके बावजूद, वे अपने कम वेतन वाले बेटे, बीमार बहू और चार साल की पोती को घर से निकालना चाहते थे। डीएम कोर्ट ने पाया कि सेवानिवृत्त अधिकारी ने केवल फ्लैट के लिए अपने बेटे के परिवार को बेघर करने की योजना बनाई थी।
इस फैसले के साथ, डीएम ने एसएसपी को भी निर्देश दिए हैं कि वे हर महीने दो बार बेटे-बहू के घर का निरीक्षण करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के जीवन में हस्तक्षेप न करें और शांति व्यवस्था बनी रहे।