धमतरी

Dhamtari News: माँ अंगारमोती धाम में उमड़ा भक्ति का सैलाब, देव स्वरूपों ने खेली पारंपरिक होली

Dhamtari News: उत्सव की शुरुआत दोपहर करीब 2 बजे विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। आदिवासी संस्कृति की गहरी जड़ों को दर्शाते हुए सबसे पहले ''पेन पुरखा'' को फागुन जोहार अर्पित किया गया।

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Mar 06, 2026

Dhamtari News: आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति के संगम स्थल गंगरेल स्थित माँ अंगारमोती ''पेनठाना'' में इस वर्ष देव होली का एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जो आधुनिकता और प्राचीन मान्यताओं के सुंदर समन्वय का प्रमाण था। यहाँ फागुन उत्सव केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक पावन जरिया बना।

​होली के इस भव्य उत्सव की शुरुआत दोपहर करीब 2 बजे विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। आदिवासी संस्कृति की गहरी जड़ों को दर्शाते हुए सबसे पहले ''पेन पुरखा'' को फागुन जोहार अर्पित किया गया। प्रकृति को सम्मान देते हुए माता के चरणों में नई फसल (गेहूँ की बाली) और श्रद्धा की प्रतीक ''हरवा माला'' चढ़ाई गई।

​जब देव स्वरूपों ने खेला गुलाल

​उत्सव का सबसे रोमांचक क्षण तब आया जब माता के पुजारी ईश्वर नेताम ''सिर'' (शक्तिपुंज) समाहित होकर भक्ति में लीन हो गए। मान्यताओं के अनुसार ​मतवार डोकरा, लिंगो पेन और डांग देव ने साक्षात उपस्थित होकर होली उत्सव में भाग लिया।
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जमकर उड़े गुलाल- रंग

​पारंपरिक बाजा-गाजा की थाप पर देव स्वरूपों और भक्तों के बीच जमकर गुलाल उड़े। ​हवाओं में उड़ते रंगों ने पूरे परिसर को एक दिव्य आभा से सराबोर कर दिया।

​रेला-पाटा से लेकर डीजे की धुन तक

​जहाँ एक ओर युवा अपनी गौरवशाली संस्कृति को सहेजते हुए पारंपरिक रेला-पाटा की धुन पर थिरक रहे थे, वहीं दूसरी ओर आधुनिकता का रंग भी फीका नहीं रहा। युवाओं ने डीजे की ताल पर झूमते हुए एक-दूसरे को गुलाल लगाया और भाईचारे का संदेश दिया।इस आयोजन में माँ अंगारमोती मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष जीवराखन मरई,तुकाराम मरकाम, मानसिंह मरकाम, खिलेश कुंजाम, रामेश्वर मरकाम, बंटी मरकाम, युवराज मरकाम, दिग्विजय ध्रुव, हरि नेताम, नरेंद्र नेताम, सोहन ध्रुव और रोशन मरकाम सहित भारी संख्या में श्रद्धालु और समाजजन इस सांस्कृतिक उत्सव के साक्षी बने।

Updated on:
06 Mar 2026 06:21 pm
Published on:
06 Mar 2026 06:20 pm
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