Lord Shiva Damru: भगवान शिव को डमरु अत्यंत प्रिय है। क्योंकि डमरु से निकले वाली ध्वनि समस्त संसार की उत्पत्ति का प्रतीक मानी जाती है।
Lord Shiva Damru: देवों के देव कहे जाने वालें महादेव का समस्त सृष्टि की रचना में विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इनका स्थान सभी देवताओं से ऊपर है। भगवान अपने शरीर पर कई चीजें धारण किए हुए हैं। सिर पर गंगा, गले में सांप, एक हाथ में त्रिशूल तो एक में डमरू। लेकिन क्या आपको पता है कि शिव डमरू क्यों रखते हैं और इसका क्या महत्व है। आइए जानते हैं।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव के डमरू का धार्मिक, आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। यह शिव के कई पहलुओं को दर्शाता है और उनके द्वारा सृष्टि, पालन, और संहार के चक्र को समझने में मदद करता है।
डमरू से निकले वाली ध्वनि को नाद ब्रह्म कहा जाता है। जिसे समस्त ब्रह्मांड की उत्पत्ति का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि जब भगवान शंकर डमरू बजाते हैं तो उससे ब्रह्मांडीय ऊर्जा निकती है, जो सृष्टि का आधार है।
भगवान शिव का डमरू तांडव नृत्य का एक विशेष तत्व है। जब भगवान शिव तांडव करते है, तो उनका डमरू सृष्टि और विनाश की प्रक्रिया को दर्शाता है।
मान्यता है कि डमरू की ध्वनि ध्यान और योग साधना के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके साथ ही यह मानसिक शांति और आध्यात्मिक जागृति को बढ़ावा देता है।
एक पौराणिक मान्यता के अनुसार, शिव के डमरू से 14 प्रकार की ध्वनियां (महेश्वर सूत्र) उत्पन्न हुईं, जिनसे संस्कृत भाषा और व्याकरण की रचना हुई। यह पाणिनि व्याकरण का मूल आधार है।
डमरू का आकार (दो गोलाकार भाग जुड़े हुए) सृष्टि और प्रलय के निरंतर चक्र का प्रतीक है। यह जीवन और मृत्यु के बीच संतुलन को दर्शाता है।
भगवान शिव का डमरू यह सिखाता है कि जीवन में सृजन, संरक्षण और विनाश का चक्र निरंतर चलता रहता है, और हर चीज में एक गहरी संगति और संतुलन है। डमरू हमें इस अनंत ब्रह्मांड के नाद और उसकी शक्ति का अनुभव करने का साधन प्रदान करता है।
डमरू की ध्वनि से कंपन उत्पन्न होते हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।