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11 घंटे चले धार्मिक आयोजन में सौ बटुकों का मुंडन, पहने जनेऊ

दतिया में चमत्कारी पीतांबरा माई के दर्शन कर धन्य होते श्रद्धालु यहां हर दिन दूर-दूर से आते हैं। आज भी सनातन धर्म की परंपराएं यहां जीवित दिखाई देती हैं।

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दतिया. धार्मिक नगरी दतिया स्थित पीतांबरा पीठ से कौन वाकिफ नहीं। यह सिद्ध पीठ मां पीतांबरा व मां बगुलामुखी की वजह से देश ही नहीं विश्व में जाना जाता है। इस मंदिर में विराजमान देवी प्रतिमाएं चमत्कारी ही नहीं अद्भुत है। भक्तों का मानना है कि यहां पर आने वाले हरेक भक्त को दैवीय कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का वरदान मिलता है।

सौ बटुकों का सामूहिक जनेऊ संस्कार

इस मंदिर परिसर में पिछले दिनों अद्भुत कार्यक्रम आयोजित किया गया। हर वर्ष की तरह इस बार भी जनेऊ संस्कार में संस्कारों में बटुकों को दीक्षित किया गया। दतिया के पीतांबरा पीठ मंदिर परिसर में हुए वैदिक परंपराओं और आध्यात्मिक माहौल के बीच 100 बटुकों का सामूहिक जनेऊ संस्कार भव्य रूप से संपन्न हुआ। सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक चले इस आयोजन में पूरे दिन मंदिर परिसर वेद मंत्रों और धार्मिक अनुष्ठानों से गुंजायमान रहा। इसमें शामिल हुए बटुक और धार्मिक अनुष्ठानों के विद्वानों ने पूरे मनोयोग से इस आयोजन को संपन्न कराया।

मुंडन संस्कार से शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत बटुकों के मुंडन संस्कार से हुई। इसके बाद संध्या उपासना और वैदिक विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठान किए गए। आचार्य विष्णुकांत मुडिय़ा के नेतृत्व में दीपक पुरोहित एवं पीठ के 13 पुजारीगणों ने नई यज्ञशाला में सभी बटुकों को विधिवत जनेऊ धारण कराया।

सनातन संस्कृति की परंपराएं दिखाई दीं

संस्कार के दौरान बटुकों को सनातन परंपराओं, संस्कारों और जीवन में धर्म के महत्व की जानकारी भी दी गई। जनेऊ धारण के बाद सभी बटुक स्वामी जी महाराज की चरण पादुकाओं के दर्शन हेतु पहुंचे, जहां उन्होंने सामूहिक रूप से पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

अभिभावक व श्रद्धालु रहे मौजूद

पूरे आयोजन में बड़ी संख्या में अभिभावक और श्रद्धालु उपस्थित रहे। वैदिक मंत्रोच्चार और हवन की सुगंध से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। कार्यक्रम के अंत में सभी बटुकों और उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से प्रसाद एवं भोजन ग्रहण किया। यह सामूहिक जनेऊ संस्कार न केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन रहा, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोडऩे का प्रेरक प्रयास भी साबित हुआ।इस आयोजन से पूर्व शामिल होने वाले बटुकों को सभी धार्मिक परंपरा की जानकारी दी जाती है। वे इस परंपरा के पीछे की वजह बताई जाती है। बटुकों को धार्मिक ज्ञान देकर उन्हें जीवन में सनातन धर्म के प्रति मजबूती से खड़े रहने और विभिन्न शास्त्रों के ज्ञान में पारंगत किया जाता है।