धर्म-कर्म

अहिंसा, संयम और तप जीवन के सर्वोत्तम गुण

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Feb 21, 2026
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बेंगलूरु

यशवंतपुर स्थानक में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी मेघाश्री ने कहा कि जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। धर्म उत्कृष्ट मंगल है। अहिंसा, संयम और तप सर्वोत्तम मंगल हैं, जिनके जीवन में ये गुण होते हैं, उन्हें देवता भी नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि वस्तु के स्वभाव और जीवन जीने की कला को भी धर्म कहा जाता है।साध्वी समृद्धिश्री ने कहा कि हम इस संसार को अपना घर समझ बैठे हैं, जबकि हमारा वास्तविक घर सिद्धशीला है। चार लाख चौरासी जीव योनियों में भ्रमण के बाद मनुष्य जन्म प्राप्त होता है, इसलिए इस अमूल्य जीवन को व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। ऐसे कर्म करने चाहिए जिनसे पुण्य का बंध हो और पाप कर्म कम हों। उन्होंने कहा कि पूर्व में किए गए कर्मों का भुगतान अवश्य करना पड़ता है। कर्म का सिद्धांत प्राचीन भारतीय विचारधारा है, जो बताता है कि हर व्यक्ति को अपने अच्छे और बुरे कर्मों का फल अवश्य मिलता है। अच्छे कर्म सुख और शांति देते हैं, जबकि बुरे कर्म दुःख और परेशानी का कारण बनते हैं। संघ मंत्री रमेश बोहरा ने कार्यक्रम का संचालन किया।