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मां किताब है प्यार की, बांच सके तो बांच’ — डॉ. चौरसिया

सरल काव्यांजलि की मासिक गोष्ठी में गूंजे संवेदना और त्याग के स्वर साहित्यकारों ने किया रचना पाठ, समाजसेवियों का हुआ सम्मान संवेदनाओं से सराबोर रही काव्य संध्या

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सरल काव्यांजलि की मासिक गोष्ठी में गूंजे संवेदना और त्याग के स्वर

सरल काव्यांजलि की मासिक गोष्ठी में गूंजे संवेदना और त्याग के स्वर

उज्जैन. संस्था ‘सरलकाव्यांजलि’ की मासिक काव्य गोष्ठी भावपूर्ण वातावरण में आयोजित की गई। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिव चौरसिया ने अपनी मार्मिक पंक्तियां ‘आखर आखर त्याग है, पन्नों-पन्नों सांच, मां किताब है प्यार की, बांच सके तो बांच’ सुनाकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम की जानकारी संस्था की आशागंगाशिरढ़ोणकर ने दी। गोष्ठी की अध्यक्षता शीला व्यास ने की, जबकि पूर्व न्यायाधीश शशिमोहन श्रीवास्तव और नगर निगम नेता प्रतिपक्ष डॉ. रवि राय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

रचनाओं में झलकी सामाजिक सरोकारों की छाप

आयोजित काव्य गोष्ठी में संतोष सुपेकर, गोपालकृष्ण निगम, राजेंद्र देवधरे ‘दर्पण’, डॉ. पुष्पा चौरसिया, संगीता तल्लेरा, डॉ. रफीक नागौरी, डॉ. रश्मि मोयदे, डॉ. नेत्रा रावणकर, आशीष श्रीवास्तव ‘अश्‍क’, नंदकिशोर पांचाल, मानसिंह ‘शरद’, डॉ. प्रभाकर शर्मा, अमृता उषारिया, माया बधेका, डॉ. रामप्रकाश तिवारी, नितिन पोल तथा धनसिंह चौहान सहित अनेक रचनाकारों ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ, जिसे संगीता तल्लेरा ने प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत मुक्तेश मनावत, एमजी सुपेकर, अशोक रावणकर, मनोहर मोयदे और बालकृष्ण मनावत ने किया।

समाजसेवियों का सम्मान, राष्ट्रकवि की कविता का पाठ

गोष्ठी में इस माह जन्मदिन वाले सदस्य डॉ. प्रभाकर शर्मा का विशेष सम्मान किया गया। साथ ही हर मौसम में सुबह अखबार वितरण करने वाले समाजसेवी राजेश चौहान और विशाल कछवाय को भी सम्मानित किया गया। संस्था की परंपरा अनुसार राष्ट्रकवि श्रीकृष्णसरल की कविता का पाठ अध्यक्ष डॉ. संजय नागर ने किया। कार्यक्रम का संचालन सुगनचंद्र जैन ने किया तथा अंत में आभार प्रदर्शन संतोष सुपेकर ने व्यक्त किया।