
प्यार के बिना जीवन को अधुरा ही माना जाता है, किसी को अपना पहला प्यार बड़ी आसानी से मिल जाता है तो किसी को हजार प्रयत्नों के बाद बी नहीं मिल पाता, तो कोई एक तरफा प्यार के कारण घुट घुट के अंदर ही अंदर तड़पता है, तो कुछ लोग जीवन भर पहले प्यार के न मिल पाने के कारण जीवन भर उसकी यादों के सहरे जीता हैं, संजोके रखता हैं, हर किन्हीं कारणों से कुछ कर नहीं पाता । अगर आप भी अपने प्यार को हमेशा के लिए पाना चाहते हैं तो इस शरद पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से लेकर रात के 1 बजे तक कभी भी बस इस छोटे से प्रयोग जरूर करें.. दुनिया की कोई भी ताकत आपके प्यार को आपके पास आने से नहीं रोक सकती, इस प्रयोग से प्यार ही नहीं पैसा भी आपके पास वह खींचा खींचा चला आयेगा । शरद पूर्णिमा 24 अक्टूबर 2018 दिन बुधवार को हैं ।
- पूर्णिमा तिथि को किए गए सभी कार्य पूर्ण होकर ही रहते हैं,
- अपने प्यार को पाने के लिए नीचे दी गई विधि के अनुसार ही प्रयोग करना हैं ।
- प्रयोग करने के लिए, आधा मीटर, काला कपड़ा, 2 पीले नींबू, 1 सफेद कागज, औऱ थोड़ा सा सिन्दूर आदि सामग्री पहले ही एकत्रित करलें -
1- शरद पूर्णिमा दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करके काली माँ के किसी मंदिर में सभी सामग्री लेकर जायें, सबसे पहले माता के सामने दंडवत लेटकर प्रणाम करें ।
2- मंदिर में प्रणाम करने के बाद सभी सामग्रियों को लेकर सीधे किसी सुनसान स्थान पर जाकर एक नींबू, पर उस स्त्री या पुरूष का नाम लिखें (जिसे आप पाना चाहते है, धन की कामना हो तो मां लक्ष्मी जी का नाम ) और दूसरे नींबू पर अपना नाम लिखें ।
3- अब सफ़ेद कागज पर उस स्त्री - पुरूष या अन्य कामना का नाम हरे रंग के पेन से 251 बार लिखें ।
4- नाम लिखने के बाद उन दोनों नीबूं को उस सफेद कागज में लपेट लें ।
5- अब उस निंबू वाले कागज को अपने दाहिने हाथ में लेकर 108 बार नीचे दिए गए मंत्र का उच्चारण करें ।
6- जब मंत्र पूरा हो जाये तो उन दोनों निम्बूओं को कागज से निकल लें ।
7- अब जिस नीबूं पर उस उनका 251 बार का नाम लिखा है उसे काट कर उसका रस पी जाएँ ।
8- अगले दिन कागज और दूसरे वाले नीबूं को काले कपड़े में बांधकर किसी बहते हुए पानी में अपनी इच्छा बोलते हुए बहा दें ।
इस मंत्र का जप 108 बार करना हैं
मंत्र
।। ऊँ ज्ञानी न मपि चेतांसि देवी भगवती हिंसा ग्रहा बलादा कृष्य मोहाय महामाया परयकस्टी ।।
शरद पूर्णिमा के दिन इस प्रयोग को करते समय नीचे बताई सावधानी का पालन करना अनिवार्य है ।
1- इस प्रयोग को केवल शरद पूर्णिमा या अन्य किसी भी पूर्णिमा वाले दिन ही करना हैं ।
2- प्रयोग करते समय आपको कोई भी देखे नहीं और ना ही कोई आपके साथ हो ।
3- दोनों नीबूं केवल पीले रंग के ही होने चाहिए ।
4- नीबूं को वहीं से काटें जहाँ आपने नाम लिखा है ।
4- मंत्र का जप करते वक्त ध्यान रखे मंत्र के शब्दों का उच्चारण शुद्ध और सही तरीके से पूर्ण विश्वास के साथ ही करना हैं ।