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महाकाल के शिखर पर है नागचंद्रेश्वर मंदिर, 365 दिनों में केवल 24 घंटे कर सकते हैं दर्शन

nagchandreshwar temple ujjain : माना जाता है कि नागचंद्रेश्वर दर्शन से काल सर्प दोष कट जाता है, पितृ दोष का होता निवारण
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भारत

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deepak deewan

Aug 17, 2026

नागचंद्रेश्वर मंदिर

नागचंद्रेश्वर मंदिर- image patrika

nagchandreshwar ujjain : उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर के शिखर पर एक और मंदिर है जोकि वर्ष में सिर्फ एक बार खुलता है। इसे नागचंद्रेश्वर मंदिर के रूप में जाना जाता है। इस विख्यात मंदिर के पट केवल नागपंचमी के मौके पर 24 घंटों के लिए खोले जाते हैं। मंदिर की यह पंरपरा नागराज तक्षक से जुड़ी है। मान्यता है कि उनकी साधना में खलल न पड़े, इसलिए साल के 364 दिनों तक मंदिर को बंद रखा जाता है। इस प्रकार नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन के लिए साल के 365 दिनों में केवल एक दिन ही मिलता है। इस सुविधा का लाभ उठाने नागपंचमी के मौके पर उज्जैन में देश-विदेश से भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। माना जाता है कि नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन मात्र से काल सर्प दोष कट जाता है।

भगवान शिव-पार्वती और गणेश जी फन फैलाए नाग पर विराजमान

नागचंद्रेश्वर मंदिर, महाकाल मंदिर के तीसरे तल पर स्थित है। मंदिर में जो प्रतिमा हैं उसमें भगवान शिव-पार्वती और गणेश जी फन फैलाए नाग पर विराजमान हैं। यह बेहद दुर्लभ प्रतिमा मानी गई है। शिव और माता पार्वती 7 फनों वाले नाग के छत्र के नीचे विराजमान हैं। भगवान गणेश, नंदी और सिंह की आकृतियां भी हैं। प्रतिमा में शिवजी के गले और भुजाओं में नाग लिपटे उकेरे गए हैं।

भगवान नागचंद्रेश्वर की यह प्रतिमा अपनी दुर्लभ कलात्मकता के लिए भी विख्यात

धार्मिक महत्व के कारण श्रद्धालुओं के लिए इस मूर्ति का एक अलग ही आकर्षण है। इसके साथ ही भगवान नागचंद्रेश्वर की यह प्रतिमा अपनी दुर्लभ कलात्मकता के लिए भी विख्यात है। यह भी कहा जाता है कि प्रतिमा मूलत: नेपाल की है।

नागराज तक्षक ने भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए कठिन साधना की

साल में केवल एक बार दर्शन देनेवाले भगवान नागचंद्रेश्वर, विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर के तीसरे खंड में विराजमान हैं। पौराणिक मान्यता है कि नागराज तक्षक ने भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए कठिन साधना की। जब शिवजी ने उनसे वर मांगने को कहा तो तक्षक ने आराधना के लिए निर्बाध और एकांत स्थान मांगा। तब शिव ने महाकाल परिसर के रूप में उनकी यह इच्छा पूरी की। नागराज तक्षक की इसी मनोकामना के कारण नागचंद्रेश्वर मंदिर के द्वार वर्षभर बंद रखे जाते हैं।