भगवान गणेश देवताओं के प्रथम पूजनीय हैं। प्रत्येक शुभ कार्य को करने से पहले उनकी पूजा करनी चाहिए। गणेश जी विघ्नहर्ता भी कहलाते हैं।
नई दिल्ली। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। भगवान गणेश समस्त देवी-देवताओं में प्रथम पूजनीय हैं और इनकी पूजा करने से व्यक्ति को बुद्धि,बल और विवेक की प्राप्ति होती है। गणेश जी अपने भक्त को सभी परेशानियों से मुक्ति दिलाते हैं और उसके जीवन के तमाम विघ्नों को हर लेते हैं। उनकी पूजा करने के लिए एक खास मंत्र का जाप करने से जल्दी ही लाभ प्राप्त होता है और सारे संकट दूर होते हैं।
1.गणेश जी के इस मंत्र का जाप करते समय ध्यान रखे कि उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके बैठें और बैठने के लिए कुशा के आसन का प्रयोग करें।
2.इस मंत्र को पढ़ने के लिए बुधवार का दिन उपयोगी माना जाता है क्योंकि शास्त्रों में इस दिन को गणेश जी का दिन माना गया है।
3.मंत्र जाप से पूर्व गणेश जी की एक छोटी प्रतिमा को चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर रख दें और उनके समक्ष देसी घी का दीपक जलाएं।
4.रूद्राक्ष की माला से प्रत्येक बुधवार के दिन 108 बार ॐ सद्बुद्धि प्रदायै नमः मंत्र का जाप करें और गणेश जी से हमेशा आशीर्वाद बनाए रखने की प्रार्थना करें।
5.मंत्र का जाप करने के बाद गणेश जी को लाल रंग के फूल अर्पण करें और साथ ही भोग स्वरूप उनके प्रिय मोदक अर्पण करें। गणेश जी को मोदक अर्पण करने के बाद बच्चों एवं ग़रीबों को मोदक बांट दें इससे गणेश जी की कृपा से नौकरी और व्यापार संबंधित परेशानी खत्म होती है।
6.इस मंत्र का 108 बार पाठ करने वाले व्यक्ति को ज़रूर लाभ मिलता है और गणेश जी उसके जीवन के सभी प्रकार के दोषों को खत्म करते हैं।
7.इस मंत्र को पढ़ने वाले व्यक्ति का रुका हुआ पैसा बहुत जल्दी मिलता है और चारों तरफ से धन प्राप्ति होने लगती है इसलिए इस मंत्र को ज़रूर पढ़ें।
8.वहीं इस मंत्र का जाप करने के बाद गणेश जी को दूर्वा घास चढ़ानी चाहिए इसका उल्लेख शास्त्रों में भी किया गया है कि गणेश जी को दुर्वा प्रिय है।
9.मनचाहे वरदान की प्राप्ति के लिए और मनचाही इच्छा को पूरा करने के लिए गणेश जी के इस मंत्र का पाठ अवश्य करें और लाभ पाएँ।
10.इसके अलावा गणेश जी की पूजा में तिल के लड्डू, गुड़, रोली, मोली, चावल, तांबे का लोटा, नारियल, जल, धूप, प्रसाद के तौर पर केले का उपयोग ज़रूर करें।