
फैजाबाद : रमजान मतलब रहमत और बरकत का पाक महीना.जैसा की आप सभी जानते है साल में 12 महीने होते हैं । और इन महीनों में हमसे जाने-अनजाने बहुत से ऐसे गुनाह हो जाते हैं .जो शायद हम जान भी नही पाते और इन गुनाहों से तौबा करने के लिए अल्लाह हमको रमज़ान का एक महीना देता है । जिसमें हम अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं ।और अपने अंदर अच्छाइयां और नेक रास्ते पे चलने की दुआ माँगते है .इस महीने में हम रमज़ान के 30 (तीस -सो ) दिन रोजे रखते हैं और पांचो वक्त की नमाज अदा करते हैं और हर नमाज में हम अल्लाह से यही दुआ करते हैं कि बीते 11 महीनों में हम से जो भी जाने अनजाने गुनाह हुए हो उन्हें माफ करके हमें नेक राह पर चलने की तौफ़ीक अता फ़रमा और ये महीना बहुत पाक महीना कहलाता है .मुसलमान भाई बहन इस महीने को बहुत अहमियत देते हैं इसमें नमाज किताब के साथ- साथ सच बोलने की भी जद्दोजहद (कोशिश) करते हैं .
पांचो वक्त की नमाज़ के साथ बेहद ज़रूरी है कि आप नमाज किताब के साथ- साथ सच बोलने की भी जद्दोजहद करें
रोजे की इस तासीर (मतलब) खुसूसीयत का जिक्र खुद कुरान मजीद में शराहत और वजाहत के साथ फरमाया गया है सूरे बकरा में रमजान के रोजे की फर्जियत का एलान फरमाने के साथ ही इरशाद फरमाया गया है लाअललकुम तत्ताकून यानी इस हुक्म का मकसद यह है की तुममे तक़वा पैदा हो हजरत अबू हुरैरा रजी अल्लाह अन्हु से रिवायत है की रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया जब रमजान आता है तो जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और दोज़ख के दरवाज़े बन्द कर दिए जाते है और शयातीन (शैतान) जकड़ दिए जाते हैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया जो लोग रमजान के रोजे ईमान और एहतेसाब के साथ रखेंगे उनके सब गुनह माफ कर दिए जाएंगे और ऐसे ही जो लोग ईमान और एहतेसाब के साथ रमजान की रातों में नवाफिल तारवी तहज्जुद पड़ेंगे उनके भी सब पिछले गुनाह माफ कर दिए जाएंगे