– विवि परिसर में उगाई जा रही चाइनीज और कलरफुल गोभी– आम गोभी के मुकाबले एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और विटामिन की मात्रा अधिक ग्वालियर.बाजार में मिलावट और रासायनिक छिड़काव के चलते शुद्ध और पोषक सब्जियां मिलना मुश्किल होता जा रहा है, जिससे लोगों की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस चुनौती को देखते हुए […]
– विवि परिसर में उगाई जा रही चाइनीज और कलरफुल गोभी– आम गोभी के मुकाबले एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और विटामिन की मात्रा अधिक
ग्वालियर.बाजार में मिलावट और रासायनिक छिड़काव के चलते शुद्ध और पोषक सब्जियां मिलना मुश्किल होता जा रहा है, जिससे लोगों की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस चुनौती को देखते हुए कृषि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण और पोषण से भरपूर सब्जियों के विकल्प तलाशे जा रहे हैं। इसी क्रम में विश्वविद्यालय परिसर में कलरफुल गोभी (परपल व पीली) और चाइनीज गोभी पर शोध किया जा रहा है, जो सफल साबित हो रहा है।
विश्वविद्यालय में चाइनीज किस्म सहित करीब 200 से 250 परपल और पीली रंग की गोभी उगाई गई है। शोध के शुरुआती परिणाम उत्साहजनक हैं और यह प्रयोग किसानों के लिए भी नए अवसर खोल सकता है।रिसर्च हेड डॉ. सुषमा तिवारी ने बताया कि आम गोभी की तुलना में कलरफुल गोभी में एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है। इनमें फाइबर भी ज्यादा पाया जाता है, जिससे पाचन बेहतर होता है। गोभी रोपण के करीब 50 दिनों में अच्छे आकार और रंग की कलरफुल गोभी प्राप्त हुई है, जो शोध की सफलता को दर्शाता है।उन्होंने बताया कि गोभी के रंगों के कारण उसमें प्राकृतिक रूप से एंटीऑक्सीडेंट विकसित हो जाते हैं। पीली कलरफुल गोभी में आम गोभी की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक विटामिन ए पाया जाता है, जो आंखों की रोशनी और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए लाभकारी है। वहीं इनमें विटामिन सी भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहता है।
चाइनीज गोभी वजन नियंत्रित करने में सहायक
शोध में यह भी सामने आया है कि चाइनीज गोभी में फाइबर की मात्रा अधिक होती है। यह न केवल पाचन को दुरुस्त करती है, बल्कि वजन नियंत्रित करने में भी मददगार साबित होती है। विश्वविद्यालय में पहली बार किए गए इस शोध के परिणाम सकारात्मक रहे हैं।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में अहम कदम
इस शोध से यह स्पष्ट हुआ है कि ग्वालियर अंचल में कलरफुल और चाइनीज गोभी की खेती संभव है। इससे किसानों को नई फसल का विकल्प मिलेगा, जिससे उनकी आय बढ़ सकती है। साथ ही आम लोगों को एंटीऑक्सीडेंट और न्यूट्रीएंट्स से भरपूर गोभी उपलब्ध हो सकेगी। सेहत और कृषि—दोनों दृष्टि से यह शोध एक सकारात्मक और दूरगामी कदम माना जा रहा है।