
ग्वालियर. प्रॉपर्टी कारोबारी पंकज सिकरवार की बालाजीपुरम में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या मामले में 81 दिन बाद भी वारदात का मास्टरमाइंड बदमाश परमाल सिंह तोमर सहित शूटर्स पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। पंकज के परिजन का कहना है कि उसको मारने वाले कहां दुबके हैं। पुलिस पता लगाने में अभी तक नाकाम है, हत्याकांड के बाद परिवार को जो सुरक्षा मुहैया मिली थी उसमें कटौती कर दी है। खुटका है कि पंकज की हत्या कर अंडरग्राउंड बदमाश सुरक्षा कम होने से परिवार को निशाना बना सकते हैं।
पंकज के चचेरे भाई संतोष ने बताया कि पंकज की दिनदहाड़े हत्या के बाद पुलिस ने घर पर 6 पुलिसकर्मियों का 24 घंटे का पहरा बैठाया था, अब उसमें कटौती कर दी है। सिर्फ तीन पुलिसकर्मियों को ही डयूटी पर लगाया जा रहा है। इसी तरह आरोपियों के बारे में जानकारी रखने वालों को मुहैया सुरक्षा गार्ड भी हटा लिए गए हैं। हत्याकांड में चालान पेश होने में सिर्फ सात दिन बचे हैं। अभी तक मुख्य आरोपियों का पता नहीं चला है। पकड़ से बाहर वो लोग हैं, जिन्होंने पंकज की हत्या की साजिश रची, भाड़े के शूटर्स लाकर उसे अंदाज दिलाया। पुलिस ने अभी तक जो आरोपी पकड़े वह सिर्फ परमाल सिंह तोमर के गैंग के मददगार ही हैं।
हत्या के मुख्य आरोपी परमाल, पंकज को गोली मारने वाला आशू तोमर, सोनू, साजिश में शामिल रमन चौहान और संजय तोमर घटना के बाद से लापता हैं। संतोष के मुताबिक इन आरोपियों के पकड़ से बाहर रहने के बावजूद पंकज के परिवार की सुरक्षा में कटौती उनके लिए खतरा है आइजी राजाबाबू सिंह और एसपी नवनीत भसीन को भी सुरक्षा को लेकर अवगत कराया है।
यह है घटनाक्रम
पंकज सिकरवार की गुंडे परमाल तोमर ने 10 जुलाई की दोपहर को बालाजीपुरम में हत्या की थी। उस वक्त पंकज ऑफिस से यहां आए थे। शूटर्स ने पुख्ता मुखबिरी पर उन्हें रास्ते में घेर लिया था। पंकज को नौ गोलियां मारी थीं। हत्या की वजह केबल कारोबार की दुश्मनी बताई गई थी। हत्या के बाद मुख्य सभी आरोपी फरार हैं। हत्याकांड में गुंडे परमाल के जो मददगार पकडे गए हैं उन्होंने पूछताछ में पुलिस को बताया है कि परमाल कई महीनों से पंकज की हत्या की साजिश बना रहा था, लेकिन पंकज को भी आभास था कि परमाल वारदात कर सकता है तो पंकज सर्तक थे। लेकिन हत्या से कुछ दिन पहले मध्यस्थ ने भरोसा दिलाया था कि परमाल हरकत नहीं करेगा।
रह गया सिर्फ एक सिपाही
पंकज के परिजन का कहना है पिछले कुछ दिन से दिन और रात में तीन, तीन पुलिसकर्मी घर के बाहर सुरक्षा में तैनात थे, लेकिन गुरुवार को सिर्फ एक सिपाही रह गया। ऐसा क्यों हो रहा है। पुलिस अधिकारियों को भी स्थिति बता चुके हैं, वह बात तो सुन लेते हैं, लेकिन नतीजा नहीं निकलता। पुलिस का यह रवैया समझ में नहीं आ रहा है।