ग्वालियर

इंतजार खत्म: 50 करोड़ की मशीनों से कैंसर का होगा ‘सटीक’ इलाज

अंचल के कैंसर मरीजों के लिए राहत की खबर है। करीब एक दशक से भी लंबा इंतजार अब खत्म होने को है। जयारोग्य चिकित्सालय के कैंसर विभाग में 50 करोड़ रुपये की लागत से चार विश्वस्तरीय और अत्याधुनिक मशीनें पूरी तरह तैयार हैं।

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May 19, 2026
कैंसर विभाग में मशीनों के लिए नई बिल्डिंग में रूम बनकर तैयार हो गए हैं। - पत्रिका

ग्वालियर. अंचल के कैंसर मरीजों के लिए राहत की खबर है। करीब एक दशक से भी लंबा इंतजार अब खत्म होने को है। जयारोग्य चिकित्सालय के कैंसर विभाग में 50 करोड़ रुपये की लागत से चार विश्वस्तरीय और अत्याधुनिक मशीनें पूरी तरह तैयार हैं। इन मशीनों के आने से कैंसर का जो जटिल इलाज दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों के निजी अस्पतालों में 2 से 5 लाख रुपये में होता है, वह यहां महज 10 से 20 हजार रुपये में संभव होगा, आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए यह पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा। इन मशीनों के अगले माह तक आने की संभावना है, डॉक्टरों का दावा है कि आते ही इनको इंस्टॉल कराने के बाद इलाज शुरू कर दिया जाएगा। इन मशीनों का ग्वालियर तक पहुंचने का सफर किसी संघर्ष से कम नहीं रहा। 2015 में शासन ने ग्वालियर को स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की तर्ज पर विकसित करने के लिए मशीनों की स्वीकृति दी। 2018 तक तीन साल की कागजी कसरत के बाद फंड जारी हुआ। जब टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई, तब कोविड महामारी ने पूरी दुनिया को रोक दिया, जिससे ऑर्डर अटक गए। 2024-26 में मशीनों को रेडिएशन से सुरक्षित रखने के लिए 7 करोड़ की लागत से विशेष बंकर और नई बिङ्क्षल्डग तैयार की गई।

ये 4 मशीनें जो बदल देंगी इलाज की तस्वीर

कैंसर विभाग के रेडियोथैरेपी सेक्शन में अब ये अत्याधुनिक तकनीकें उपलब्ध होंगी:

  1. डुअल-एनर्जी लीनियर एक्सीलरेटर: यह मशीन स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचाए बिना सीधे कैंसर कोशिकाओं पर सटीक वार करती है।
  2. सीटी सिम्युलेटर: रेडिएशन देने से पहले यह ट्यूमर का सटीक थ्रीडी डिजिटल नक्शा बनाती है, जिससे रेडिएशन की सही डोज तय होती है।
  3. ब्रेकी थैरेपी: यह आंतरिक रेडिएशन तकनीक महिलाओं के गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स), प्रोस्टेट और ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के लिए रामबाण मानी जाती है।
  4. पेट सीटी : इससे शरीर के किसी भी हिस्से में कैंसर के प्रसार की शुरुआती स्टेज में ही पहचान हो सकेगी।

विशेषज्ञों की राय

इन अत्याधुनिक मशीनों के आने से मरीजों को दिल्ली-मुंबई जाने और लाखों रुपये के भारी-भरकम खर्च से बड़ी राहत मिलेगी। हमारा जीआर मेडिकल कॉलेज प्रदेश का ऐसा पहला मेडिकल कॉलेज होगा, जिसमें कैंसर इलाज के लिए एक साथ इतनी आधुनिक मशीनें उपलब्ध होंगी।
डॉ. अक्षय निगम, एचओडी, कैंसर विभाग

मशीनों को रखने के लिए विशेष रूम और बंकर बनकर तैयार हो चुके हैं। संभवत: जल्द ही मशीनें यहां पहुंच जाएंगी, जिससे दूर-दराज से आने वाले गरीब मरीजों को बहुत बड़ा फायदा मिलेगा।
डॉ. मनीष चतुर्वेदी, प्रवक्ता, जीआरएमसी

Published on:
19 May 2026 05:56 pm
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