पिता-पुत्रों की मौत, मां-बेटी की सूनी आंखों में थम नहीं रहे आंसू-पानी बना काल, गांव रासूवाला में एक ही घर के तीन चिराग बुझे-पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने परिजनों को सौंपे तीनों शवहनुमानगढ़/ संगरिया. उपखंड क्षेत्र के गांव रासूवाला में एक ही डिग्गी में डूबकर पिता और उसके दो जवान बेटों की मौत हो गई। […]
पिता-पुत्रों की मौत, मां-बेटी की सूनी आंखों में थम नहीं रहे आंसू
-पानी बना काल, गांव रासूवाला में एक ही घर के तीन चिराग बुझे
-पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने परिजनों को सौंपे तीनों शव
हनुमानगढ़/ संगरिया. उपखंड क्षेत्र के गांव रासूवाला में एक ही डिग्गी में डूबकर पिता और उसके दो जवान बेटों की मौत हो गई। इस घटना ने बुधवार को पूरे गांव को शोक में डूबो दिया। हर गली में सन्नाटा पसरा रहा। इस घटना में वार्ड नंबर आठ निवासी गुरदीपसिंह (40) पुत्र मेजरसिंह कुम्हार और उनके दोनों बेटे लखविंद्रसिंह (22) व राजविंद्रसिंह (16) की डूबने से मौत हो गई। बुधवार को तीनों शवों के पोस्टमार्टम करवाकर पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिए। बताया जा रहा है कि तीनों मंगलवार दोपहर खेत में कीटनाशी का छिडक़ाव करने निकले थे। लेकिन वापस उनकी अर्थियां ही लौटी।
गुरदीपसिंह मेहनती, शांत और मिलनसार किसान थे। उनका बड़ा बेटा लखविंद्रसिंह बीएसटीसी करने के बाद हाल ही में रीट परीक्षा देकर भविष्य के सपने बुन रहा था। छोटा बेटा राजविंद्रसिंह दसवीं का छात्र था। हंसमुख, पढ़ाई में ठीक और खेती किसानी से दूर रहने वाला। उस दिन स्कूल से जल्दी छुट्टी हो गई, तो वह भी पिता और भाई के साथ खेत चला गया। किसी को क्या पता था कि यह उसका आखिरी सफर होगा। घटनाक्रम के अनुसार गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर इंद्रगढ़ रोही के चक सात पीटीपी क्षेत्र में पड़ोसी खेत में बनी करीब 20 फीट गहरी और 82 फीट चौड़ी पानी की डिग्गी से पानी निकालते समय गुरदीपसिंह का पैर फिसल गया। पिता को डूबता देख दोनों बेटे बचाने के लिए कूद पड़े। ग्रामीणों के अनुसार, एक बेटे ने बेल्ट खोलकर बाहर खींचने की कोशिश भी की, लेकिन गहराई और पानी की चपेट में तीनों एक-एक कर समा गए। जो डिग्गी खेतों को जीवन देती थी, वही उस दिन तीन जिंदगियों की कब्र बन गई।
परिवार पर पहले भी टूटा, ऐसा ही वज्रपात
यह हादसा इस परिवार के लिए पहली त्रासदी नहीं है। वर्षों पहले गुरदीपसिंह के बड़े भाई जगजीतसिंह की भी खेत में पानी पीते समय फिसलकर मौत हो गई थी। उनकी मृत्यु के दो माह बाद बेटे सतनाम सिंह का जन्म हुआ। जो आज गांव में इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाता है। एक ही परिवार में पानी से दूसरी बार मौत ने गांव वालों को झकझोर दिया।
मां-बेटी की चीत्कार ने रुला दिया सबको
एक ही परिवान के तीन प्रमुख लोगों की मौत के बाद अब घर में केवल मृतक किसान की पत्नी परमजीतकौर (36) और उसकी बेटी अमनदीप कौर (18) बची हैं। अमनदीप हनुमानगढ़ के एक निजी शिक्षण संस्थान में बीएसटीसी प्रथम वर्ष की छात्रा है। घर में मातम का ऐसा आलम है कि मां-बेटी की चीत्कार सुनकर पड़ोसियों के कलेजे कांप उठे। मां बार-बार बेसुध होकर बेटों का नाम लेती रही, तो बेटी मां को संभालने की कोशिश करती नजर आई। भतीजे सतनाम सिंह की रुलाई ने भी हर मौजूद व्यक्ति की आंखें भिगो दीं। ग्रामीण एवं परिजन ढांढस बंधाते नजर आए।
इस तरह लगा पता
शाम तक जब तीनों घर नहीं लौटे तो परिजन और ग्रामीण खोजबीन के लिए खेत पहुंचे। डिग्गी में तैरते अपनों को देख सबके होश उड़ गए। ग्रामीणों की मदद से तीनों को बाहर निकालकर सरकारी अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना पर एसआई प्रमोदसिंह के नेतृत्व में पुलिस रात को मौके पर पहुंची और शव मोर्चरी में रखवाए।