हनुमानगढ़ के संगरिया क्षेत्र के हरिपुरा गांव में बुजुर्ग राजपाल की मौत को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। आरोप है कि राजनीतिक रंजिश में एक जनप्रतिनिधि को फंसाया जा रहा है, जबकि मौत से पहले हुई पारिवारिक मारपीट की अनदेखी की गई।
हनुमानगढ़ (संगरिया): गांव हरिपुरा में बुजुर्ग की हत्या मामला अब गांव की सीमाओं से निकलकर प्रशासनिक निष्पक्षता, राजनीति और साजिश के गंभीर सवालों तक पहुंच गया है। गुरुवार को पूर्व सरपंच करनैल सिंह किंगरा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने एसडीएम जय कौशिक, डीएसपी रमेश माचरा, सीआई अमर सिंह को इस आशय के ज्ञापन सौंपे।
साथ ही आरोप लगाया है कि मृतक हरिपुरा गांव निवासी राजपाल (55) पुत्र फिरंगीलाल अरोड़ा की मौत मामले में वास्तविक तथ्यों को दबाकर जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और उसके पिता को जानबूझकर फंसाया जा रहा है। जबकि घटनाक्रम की अहम कड़ियों को नजरअंदाज कर दिया।
ग्रामीण के अनुसार, मृतक राजपाल लंबे समय से नशे का आदी था। मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी। नशे की हालत में वह गाली-गलौच, अभद्र व्यवहार और उग्रता दिखाता। इससे आसपास के लोग भयभीत रहते थे। कई बार हालात इतने बिगड़ जाते थे कि उसे डंडे का डर दिखाकर काबू में करना पड़ता था।
वह अपने भाई गोविंदलाल उर्फ नीटा के संग रहता था। उसका पारिवारिक जीवन कलह से भरा था। आरोप है कि भाई-भाभी उससे मारपीट करते और उसे काबू में रखने के नाम पर बांध देते। घर में भोजन और देखभाल नहीं मिलने से राजपाल गांव में भीख मांगकर गुजारा करता था।
ग्रामीणों ने बताया कि वार्ड पंच गुरतेज सिंह मृतक राजपाल के पड़ोसी हैं। मानवीय आधार पर कई बार मदद करते। राजपाल उग्र होता तो गुरतेज सिंह ही उसे शांत करते थे। 31 दिसंबर को हुए विवाद दौरान गुरतेज और अन्य ग्रामीणों ने राजपाल को छुड़ाया। धर्मशाला में बैठाया और डॉक्टर बुलाकर उसके हाथ में आई चोट का उपचार कराया।
उसी दिन शाम फिर से राजपाल ने हंगामा किया तो 181 पर सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और राजपाल को जीप में बैठाकर गुरुद्वारे तक ले गई। लेकिन बाद में समझाइश कर गुरतेज सिंह को सुपुर्द कर चली गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह दर्शाता है कि पुलिस उस समय गुरतेज सिंह को भरोसेमंद मान रही थी।
आरोप लगाया कि एक जनवरी की रात गोविंदलाल के घर से चीख-पुकार और मारपीट की आवाजें सुनाई दी थीं। उस वक्त घर में गोविंदलाल, उसकी पत्नी भोली और दामाद मौजूद थे। अगले दिन सुबह राजपाल अपने घर में मृत मिला, जिसके बाद गोविंदलाल ने मर्ग दर्ज करवाई।
इसके बावजूद राजनीतिक रंजिश के चलते कुछ लोगों ने एक वीडियो को आधार बनाकर दो जनवरी को झूठी एफआईआर दर्ज करवा दी। ग्रामीणों का दावा है कि ये लोग अवैध कब्जों, नशे के कारोबार और कुछ गैर कानूनी गतिविधियों से जुड़े हैं और पंचायत चुनाव नजदीक होने के कारण एक मुखर वार्ड पंच को रास्ते से हटाने की साजिश रची गई है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि मौत से एक रात पहले घर के भीतर हुई कथित मारपीट की जांच क्यों नहीं की गई और जांच अधिकारी ने परिवारजनों की भूमिका पर अब तक ध्यान क्यों नहीं दिया। इससे जांच की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है। मांग की गई है कि मामले की गहन, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। कॉल रिकॉर्ड, वीडियो साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और मर्ग जांच के आधार पर सच्चाई सामने लाई जाए ताकि निर्दोष को सजा न मिले और वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई हो।
ग्रामीणों में इस प्रकरण को लेकर चर्चा तेज है और लोग प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर टिकाए हुए हैं। प्रतिनिधि मंडल में पूर्व पंच तरसेम सिंह, पंच प्रतिनिधि गुरसेवक सिंह, सरजीत सिंह लंबरदार, हंसराज पूर्व पंच, किसान मोर्चा के दर्शन सिंह, शिवभगवान, ओमप्रकाश, हरमन सिंह, जसपाल, नरेंद्र, गुरलाल, प्रवीण, जयसिंह, देवेंद्र व अन्य शामिल रहे। डीएसपी रमेश माचरा ने निष्पक्ष तरीके से जांच उपरांत अपेक्षित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
हरिपुरा गांववासी सुरजीत सिंह ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई कि मृतक हरिपुरा गांव निवासी राजपाल अरोड़ा अविवाहित और मानसिक बीमार होने से अकेला रहता था। दवाइयां छोड़ने से उसकी हालत बिगड़ गई थी। लोगों से भोजन मांग जीवन-यापन करता था। 31 दिसंबर दोपहर तीन बजे बस अड्डे की ओर जा रहा था।
इसी दौरान धर्मशाला नजदीक उसने देखा कि गुरतेज सिंह, मेजर सिंह व 2-3 अन्य राजपाल को धर्मशाला की चारदीवारी के भीतर पेड़ से बांधकर लाठियों से बेरहमी से पीट रहे थे। मुश्किल से उसे छुड़ाया। इससे पहले और एक दिन पहले तेज सिंह व उसके पुत्र ने राजपाल से घर में मारपीट की गई। लगातार मारपीट चलते राजपाल की गंभीर हालात में मृत्यु हो गई।