
Lower Back Pain Causes: कमर दर्द आजकल एक आम परेशानी है, जिससे काफी लोग परेशान रहते हैं। यह सिर्फ किसी बीमारी की वजह से ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करने, गलत तरीके से भारी सामान उठाने या अचानक झुकने के कारण भी हो सकता है। कई बार कमर दर्द अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में यह किसी दूसरी समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कमर दर्द के 7 बड़े कारण क्या हैं और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, कमर दर्द की एक आम वजह मांसपेशियों या लिगामेंट्स में खिंचाव आना है। यह परेशानी अक्सर भारी सामान गलत तरीके से उठाने, अचानक मुड़ने या बार-बार एक जैसी फिजिकल एक्टिविटी करने से हो सकती है। इस तरह के दर्द में कमर के किसी हिस्से में अचानक दर्द महसूस हो सकता है। शरीर को घुमाने, झुकने या हिलने-डुलने पर दर्द बढ़ सकता है। कभी-कभी मांसपेशियों में अकड़न भी महसूस होती है। दर्द ज्यादा होने पर रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, स्लिप डिस्क की समस्या तब होती है, जब रीढ़ की हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क का अंदरूनी नरम हिस्सा उसकी बाहरी परत से बाहर की तरफ निकलने लगता है। ये डिस्क हड्डियों के बीच कुशन की तरह काम करती हैं और शरीर को झुकने व घूमने में मदद करती हैं। उम्र बढ़ने, चोट लगने या बार-बार गलत तरीके से झुकने और भारी सामान उठाने से डिस्क में परेशानी हो सकती है। स्लिप डिस्क होने पर कमर या गर्दन में दर्द, हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन और मांसपेशियों में कमजोरी महसूस हो सकती है।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, साइटिका में कमर से पैर तक जाने वाली साइटिक नस के रास्ते में दर्द महसूस होता है। यह परेशानी अक्सर तब होती है, जब स्लिप डिस्क या रीढ़ की हड्डी में होने वाले बदलावों के कारण नस पर दबाव पड़ता है।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों में घिसावट होने लगती है। इसे ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) कहा जाता है। रीढ़ की हड्डी के जोड़ों में भी इस तरह के बदलाव हो सकते हैं, जिससे कमर में दर्द और अकड़न महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में रीढ़ की हड्डी के आसपास नसों के लिए उपलब्ध जगह कम हो जाती है। इस स्थिति को स्पाइनल स्टेनोसिस (Spinal Stenosis) कहा जाता है। इससे कमर के साथ एक या दोनों पैरों में दर्द, झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी हो सकती है।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, रीढ़ की हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क उम्र बढ़ने के साथ अपना लचीलापन और नमी खोने लगती हैं। इससे डिस्क की ऊंचाई कम हो सकती है और रीढ़ की हड्डी में लचीलापन भी प्रभावित हो सकता है। इस तरह के बदलावों को डिजेनरेटिव डिस्क डिजीज (Degenerative Disc Disease) कहा जाता है।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ रीढ़ की हड्डियों और डिस्क में कई तरह के बदलाव हो सकते हैं। इनमें डिस्क का पतला होना और हड्डियों के किनारों पर छोटे-छोटे अतिरिक्त उभार बनना शामिल है। इन उभारों को बोन स्पर्स (Bone Spurs) कहा जाता है।अगर इनकी वजह से नसों पर दबाव पड़ने लगे, तो कमर दर्द, सुन्नपन या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, कुछ लोगों की रीढ़ की हड्डी में सामान्य से अलग घुमाव होता है या रीढ़ की हड्डियों की पोजिशन में बदलाव आ जाता है। जैसे, स्कोलियोसिस (Scoliosis) में रीढ़ की हड्डी एक तरफ मुड़ जाती है। वहीं, कुछ मामलों में रीढ़ की एक हड्डी अपनी सामान्य जगह से आगे खिसक सकती है। इस तरह के बदलाव कुछ लोगों में कमर दर्द का कारण बन सकते हैं।
ध्यान दें: अगर कमर दर्द के साथ पेशाब या मल पर कंट्रोल करने में अचानक परेशानी हो, पेशाब करने में दिक्कत हो या जांघों के बीच और प्राइवेट पार्ट के आसपास सुन्नपन महसूस हो, तो तुरंत मेडिकल मदद लें।