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Yoga Benefits: कमर दर्द से परेशान? पूर्ण शलभासन से मिलेगी राहत, रक्त प्रवाह बढ़ेगा और मजबूत होगी रीढ़

शलभासन योग करने से पीठ के निचले हिस्से के मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है और वे मजबूत होती हैं। इसके साथ ही रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है। इससे दर्द, अकड़न और थकान में राहत मिलती है।
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भारत

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Vinay Shakya

•

Oct 05, 2026

Shalabhasana Yoga Benefits

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करने की आदत ने कमर और पीठ दर्द को आम समस्या बना दिया है। ऐसे में योग शास्त्र का एक उन्नत आसन 'पूर्ण शलभासन' फिर चर्चा में है। इसे अंग्रेजी में फुल लोकस्ट पोज (Full Locust Pose) कहा जाता है। इसे रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन, पीठ की मजबूती और आंतरिक अंगों की सक्रियता के लिए उपयोगी माना जाता है।

शलभासन का अर्थ

संस्कृत में 'शलभ' का अर्थ टिड्डी और 'पूर्ण' का अर्थ संपूर्ण है। आसन की अंतिम स्थिति में शरीर उड़ान भरने को तैयार टिड्डी जैसा दिखता है। इसीलिए इसे शलभासन कहा गया। यह स्थिति जमीन पर बैठी टिड्डी जैसी दिखती है। यह आसन रीढ़ को मजबूत करने के साथ शरीर को ऊर्जा भी देता है।

शलभासन योग के फायदे

पीठ और कमर को मजबूती: आसन में पेट के बल लेटकर छाती और पैरों को एक साथ ऊपर उठाया जाता है। इससे पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है और वे मजबूत होती हैं। मांसपेशियों के स्तर पर यह कमर के निचले हिस्से, नितंब और जांघ के पिछले हिस्से को बल देता है।

रक्त प्रवाह में सुधार: पीठ और कमर के आसपास रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे दर्द, अकड़न और थकान में राहत मिलती है। यह आसन पीठ दर्द और हल्की साइटिका में भी राहत देता है।

पाचन और कब्ज: पेट पर पड़ने वाले दबाव से कब्ज दूर होती है और पाचन बेहतर होता है। अन्य योग स्रोत भी इसे पेट के अंगों को सक्रिय करने वाला बताते हैं।

लचीलापन और ऊर्जा: रीढ़ में लचीलापन आता है, शरीर का संतुलन सुधरता है और दिनभर की सुस्ती घटती है। लंबे समय तक बैठने या झुककर काम करने के असर को यह आसन कम करने में मदद करता है।

कितनी देर तक करें योग?

पूर्ण शलभासन के लिए कोई एक सर्वमान्य समय नहीं है। अलग-अलग योग संस्थाओं की सलाह इस प्रकार है:

  • सिवानंद योग केंद्र पूर्ण स्थिति में 5 से 30 सेकंड रुकने को कहता है।
  • अन्य कई योगा गाइड में शलभासन के समय 15 से 30 सेकंड रुकने और 2-3 बार दोहराने की सलाह है। धीरे-धीरे हर बार 5-10 सेकंड बढ़ाया जा सकता है।
  • मास्टरक्लास की गाइड के अनुसार शुरुआत में 3 से 5 सांसों तक रुकें और अभ्यास बढ़ने पर 10 सांसों तक जाएं।
  • एक पारंपरिक विवरण में समय 30 सेकंड से 3 मिनट तक बताया गया है, पर यह अनुभवी साधकों के लिए है।

व्यावहारिक सलाह

व्यावहारिक सलाह यही है कि 10-15 सेकंड से शुरू करें, 2-3 बार दोहराएं और बीच में मकरासन (पेट के बल विश्राम) में आराम करें। सांस रोकें नहीं, गर्दन पर ज्यादा जोर न डालें और दर्द महसूस हो तो तुरंत आसन छोड़ दें। शुरुआती दौर में आसन को ज्यादा देर तक नहीं रोकना चाहिए।

किन लोगों को इस योग से बचना चाहिए?

यह आसन देखने में कठिन है और शुरुआती लोगों को इसे योग गुरु की देखरेख में ही सीखना चाहिए। तेज पीठ दर्द, स्लिप डिस्क, गर्दन की चोट, साइटिका और हाई बीपी में यह योग नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए पुरानी बीमारी वाले लोग अभ्यास से पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। नीचे कुछ विशेष स्थितियां दी गई हैं, उस दौरान आशन करने से बचना चाहिए।

  • गंभीर कमर दर्द, स्लिप डिस्क या रीढ़ की समस्या
  • साइटिका (तीव्र अवस्था में)
  • उच्च रक्तचाप और हृदय रोग
  • हर्निया और पेप्टिक अल्सर
  • गर्भावस्था और पेट की सर्जरी के बाद
  • गर्दन या कंधे में चोट

कैसे करें अभ्यास?

सुबह खाली पेट, हवादार जगह पर मैट बिछाकर पेट के बल लेटें। ठुड्डी जमीन पर रखें और हथेलियां जांघों के नीचे या शरीर के बगल में रखें। गहरी सांस लेते हुए दोनों पैरों को सीधा रखकर ऊपर उठाएं और छाती को भी ऊपर उठाएं। कुछ देर रुकें, फिर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे नीचे आएं।

आसन से पहले हल्की वार्मअप और भुजंगासन जैसे आसन उपयोगी रहते हैं। योग विशेषज्ञों का कहना है कि आसन का असर नियमित अभ्यास से ही दिखता है। इसे इलाज का विकल्प न मानकर स्वस्थ जीवनशैली, सही बैठने की मुद्रा और संतुलित खानपान के साथ अपनाना चाहिए।