तंबाकू का सेवन करने वाले लोग, जो ज्यादा धूम्रपान करते हैं उनमें लंग कैंसर की आशंका होती है। क्योंकि धूम्रपान सीधे तौर पर फेफड़ों पर असर डालता है। इसके अलावा डस्ट वाली जगहों पर रहने वालों या धूल-मिट्टी के बीच काम करने वालों में भी लंग कैंसर की आशंका रहती है।
तंबाकू का सेवन करने वाले लोग, जो ज्यादा धूम्रपान करते हैं उनमें लंग कैंसर की आशंका होती है। क्योंकि धूम्रपान सीधे तौर पर फेफड़ों पर असर डालता है। इसके अलावा डस्ट वाली जगहों पर रहने वालों या धूल-मिट्टी के बीच काम करने वालों में भी लंग कैंसर की आशंका रहती है।
खांसी के मरीजों व कोरोना से रिकवर लोगों में लंग कैंसर का खतरा नहीं रहता, पर खांसी और कोरोना से फेफड़े कमजोर हो जाते हैं। फेफड़ों की ब्रीदिंग क्षमता कम हो जाती है।
लंग कैंसर का ज्यादा खतरा 50 साल से अधिक आयु के लोगों को रहता है। कम आयु के लोगों में इसके होने का खतरा कम होता है। जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती हैं उनमें भी लंग कैंसर का खतरा ज्यादा होता है।
स्मोकिंग, जेनेटिक डिसऑर्डर, पैसिव स्मोकिंग, धूम्रपान वाली जगहों पर जाने से भी।
धूम्रपान नहीं करें और फेफड़ों में कोई समस्या है तो इससे दूर रहें स्मोकिंग कोई कर रहा है या स्मोकिंग जोन में जाने से बचें। इम्युनिटी को बेहतर बनाएं शारीरिक रूप से एक्टिव रहें।
लंग कैंसर से बचाव के लिए प्रदूषण से बचकर रहना चाहिए। धुआं व प्रदूषित हवा इस रोग को ट्रिगर करते हैं।
बीमारियों से बचाव के लिए इम्युनिटी का बेहतर होना जरूरी है, क्योंकि इम्युनिटी बेहतर होगी तो शरीर रोगों से मुक्त रहेगा।
अपनी दिनचर्या को बेहतर रखें। खानपान में पोषण का ध्यान रखें। योग और व्यायाम को अपने रुटीन का हिस्सा बनाएं और अच्छी
नींद लें।
डॉ. राजीव रतन जैन, कैंसर रोग विशेषज्ञ