हुबली

अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस विशेष: टॉय ट्रेन से थिएटर कोच तक, यहां हर कोना सुनाता है भारतीय रेल की कहानी

तेजी से बदलती आधुनिक दुनिया में इतिहास और विरासत को सहेजने वाले संग्रहालय अतीत और वर्तमान के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करते हैं। 18 मई को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर हुब्बल्ली स्थित दक्षिण पश्चिम रेलवे म्यूजियम भारतीय रेल की गौरवशाली यात्रा, तकनीकी विकास और समृद्ध विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। यह म्यूजियम केवल पुराने उपकरणों और वस्तुओं का संग्रह नहीं, बल्कि भारतीय रेल के बदलते स्वरूप और उसकी रोचक यात्रा की कहानी भी बयां करता है। रेलवे स्टेशन के समीप स्थित यह म्यूजियम बच्चों, युवाओं और परिवारों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। यहां प्रवेश करते ही ऐसा महसूस होता है मानो आगंतुक भारतीय रेल के पुराने दौर की यात्रा पर निकल पड़ा हो। परिसर में सहेजकर रखे गए पुराने इंजन, वैगन, रेलवे उपकरण और ऐतिहासिक वस्तुएं रेल इतिहास को जीवंत कर देती हैं।
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Updated: 17 May 2026, 9:50 PM IST
हुब्बल्ली रेलवे म्यूजियम में प्रदर्शित टॉय ट्रेन लोगों को आकर्षित कर रही हैं।
हुब्बल्ली रेलवे म्यूजियम में प्रदर्शित टॉय ट्रेन लोगों को आकर्षित कर रही हैं।

थिएटर कोच लोगों के आकर्षण का केंद्र
म्यूजियम में रेलवे कार्ड टिकट प्रिंटिंग मशीन, दिनांक मशीन, गेट अटेंडेंस पंचिंग क्लॉक, प्वाइंट मशीन, सिग्नलिंग पैनल, संचार प्रणाली, वजन मापने की मशीन, टैंक वैगन और दुर्लभ रेलवे उपकरण प्रदर्शित किए गए हैं। ये वस्तुएं उस दौर की याद दिलाती हैं, जब रेलवे व्यवस्था पूरी तरह मैनुअल प्रणाली पर आधारित थी। म्यूजियम का थिएटर कोच भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस विशेष कोच में रेलवे और इतिहास से जुड़े दृश्य आधुनिक तरीके से प्रस्तुत किए जाते हैं।

पुराने स्टीम युग की यात्रा का अनुभव
बच्चों के लिए यहां की टॉय ट्रेन सबसे बड़ा आकर्षण है। यह रेलगाड़ी छुक-छुक की ध्वनि और विशेष प्रभावों के साथ पुराने स्टीम युग की यात्रा का अनुभव कराती है। इसके अलावा संग्रहालय में मॉडल ट्रेन संचालन प्रणाली भी स्थापित की गई है, जिससे सिग्नलिंग और रेल संचालन की तकनीक को समझा जा सकता है।

कई रोचक जानकारियां
म्यूजियम में एक रोचक जानकारी भी प्रदर्शित की गई है कि ट्रेन में यात्रियों को अच्छी नींद क्यों आती है। इसके पीछे ट्रेन के सस्पेंशन की वैज्ञानिक संरचना को कारण बताया गया है, जो मानव शरीर की आरामदायक कंपन आवृत्ति के अनुरूप तैयार की जाती है।

विरासत और तकनीकी विकास से जोडऩे का कार्य
कम शुल्क में उपलब्ध यह म्यूजियम नई पीढ़ी को भारतीय रेल की विरासत और तकनीकी विकास से जोडऩे का कार्य कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर ऐसे संस्थानों का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि ये केवल इतिहास को सुरक्षित नहीं रखते, बल्कि आने वाली पीढिय़ों को अपनी जड़ों से भी जोड़ते हैं।

Updated on:
17 May 2026, 9:50 PM IST
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