
Asaram Bapu : दुष्कर्म का दोषी आसाराम बापू अभी पैरोल पर है। उसे कोर्ट ने 20 दिन के लिए जेल से रिहा किया है। आसाराम को 31 अगस्त 2013 को इंदौर से गिरफ्तार किया गया था। जोधपुर ईस्ट के तत्कालीन डीसीपी आईपीएस अजय पाल लांबा ने अपनी किताब 'Gunning for the Godman: The True Story Behind Asaram Bapu's Conviction' में मामले के कई पहलू उजागर किए हैं। इसमें आसाराम की गिरफ्तारी से लेकर कोर्ट में चली सुनवाई तक के अनेक रोचक किस्से बताए गए हैं। खास बात यह है कि केस दर्ज होते ही बाबा के लोग धमकी देने लगे थे पर पुलिस की पकड़ में आते ही वह टूट गया था। उसने केस की इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर के सामने पछतावा व्यक्त करते हुए नाबालिग के साथ घटी घटना के संबंध में कहा: मुझे उससे नहीं मिलना था।
आसाराम को दुष्कर्म केस में गिरफ़्तार करने के लिए राजस्थान की पुलिस इंदौर के खंडवा रोड स्थित आश्रम पहुंची थी। उसे फ़िल्मी अंदाज़ में पकड़ा गया था। पुलिस कई घंटों तक आसाराम, उसके बेटे नारायण सांई की नौटंकियां झेलती रही। बाप बेटे ने आश्रम में हजारों अनुयायियों को बुला लिया था जोकि पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। रात गहराते ही पुलिस ने आसाराम को पकड़ा और गाड़ी में बिठाकर एयरपोर्ट ले गए। दूसरे दिन बाबा को जोधपुर में कोर्ट के सामने पेश कर दिया गया था।
आसाराम की गिरफ्तारी और बाद में उसे सजा दिलाने में मामले की इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर चंचल मिश्रा की भूमिका सबसे अहम थी। उन्हें जान से मारने तक की धमकी दी गई थी पर वे झुकी नहीं। इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर चंचल मिश्रा ने बाद में मीडिया के समक्ष आसाराम की गिरफ्तारी की पूरी कहानी बयां की। उन्होंने यह भी बताया कि गिरफ्तार होते ही आरोपी बाबा को अपनी गलती महसूस होने लगी थी। ऑफिसर चंचल मिश्रा के मुताबिक जब हम आसाराम को एयरपोर्ट लेकर जा रहे थे तो उसने रास्ते में कार में ही अपनी गलती मान ली थी। बाबा ने नाबालिग शिकायतकर्ता को बहुत छोटी बताते हुए यह भी कहा कि मुझे उससे नहीं मिलना चाहिए था।
आईपीएस अजय पाल लांबा ने किताब में लिखा है कि गिरफ़्तारी से बचने के लिए आसाराम ने अपने बेटे नारायण सांई को पुकारा और पुलिस को रोकने के लिए कहता रहा। गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस पर खूब दबाव आए। राजस्थान पुलिस के सब इंस्पेक्टर मुक्ता पारीक व सत्यप्रकाश को धमकी दी गई और लाखों करोडों का लालच भी दिया गया।