अष्टमी-नवमी एक ही दिन... सप्तमी पर होगा दुर्गाष्टमी का पूजन
पं. गुलशन अग्रवाल ने बताया, दो तिथियां एक ही दिन होने से ऐसी स्थिति बनती है। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 18 और समापन 25 मार्च को होगा। आखिरी दिन अष्टमी-नवमी तिथि एक दिन रहेगी। इसी दिन चैत्र गुड़ी पड़वा भी होगी। उदयातकालीन तिथि और नवमी तिथि क्षय होने से २४ को अष्टमी और २५ को रामनवमी मनाई जाएगी। २४ को सप्तमी होने पर भी दुर्गा महाअष्टमी पूजन होगा। अष्टमी तिथि २५ को सुबह ८.०२ बजे तक है। नवरात्र का शुभारंभ सर्वार्थसिद्धि योग में होगा। यह योग इस दिन सूर्योदय ६.०८ से रात 8.१० बजे तक रहेगा। समापन दिवस पर रामनवमी का शुभ मुहूर्त रहेगा। गौरतलब है, तीन साल से चैत्र नवरात्रि में ८ दिन का ही योग बन रहा है।
राजनीतिक उथल-पुथल वाला वर्ष
पं. अनुभव मिश्रा ने बताया, विक्रम नवसंवत्सर 2075 का नाम विरोधकृत होगा। रविवार को नववर्ष शुभारंभ पर इस दिन के स्वामी सूर्य वर्ष के राजा और शनि मंत्री होंगे। दोनों पिता-पुत्र होने के बावजूद ग्रह शत्रु माने जाते हैं। नए वर्ष में मेघेष शुक्र और धनेश चंद्र होने से राजनीतिक गठबंधन और प्रशासनिक टकराव के साथ आंदोलन होंगे। मौसम में गड़बड़ी का आशंका भी रहेगी।
नवरात्री में मां भगवती के सभी 9 रूपों की पूजा भिन्न - भिन्न दिन की जाती है, आइये देखते हैं इन 9 दिनों में देवी के कौन से रूप की पूजा किस दिन की जानी चाहिए।
18 मार्च (रविवार), 2018 - घट स्थापन एवं मां शैलपुत्री पूजा
19 मार्च (सोमवार), 2018 - मां ब्रह्मचारिणी
20 मार्च (मंगलवार), 2018 - मां चंद्रघंटा पूजा
21 मार्च (बुधवार), 2018 - मां कुष्मांडा पूजा
22 मार्च (बृहस्पतिवार ), 2018- मां स्कंदमाता पूजा
23 मार्च (शुक्रवार ), 2018- मां कात्यायनी पूजा
24 मार्च (शनिवार), 2018- मां कालरात्रि पूजा, मां महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी
25 मार्च (रविवार ), 2018 - राम नवमी
26 मार्च (सोमवार ), 2018 - नवरात्री पारण
नवरात्रि पर सप्तसती का पाठ मिलेगा लाभ
नवरात्रों में माँ भगवती की आराधना दुर्गा सप्तसती से की जाती है , परन्तु यदि समयाभाव है तो भगवान् शिव रचित सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ अत्यंत ही प्रभाव शाली एवं दुर्गा सप्तसती का सम्पूर्ण फल प्रदान करने वाला है।