
Indore news: घुटनों में दर्द, सुबह उठने पर हाथ-पैरों के जोड़ों में जकड़न और सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में परेशानी को बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन ये लक्षण आर्थराइटिस यानी गठिया भी हो सकते हैं। अब इसे केवल बुजुर्गों की बीमारी मानना सही नहीं बच्चों और युवाओं में भी जोड़ों से जुड़ी समस्याओं के केस एमवायएच अस्पताल में आ रहे हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने पर कुछ प्रकार के गठिया में जोड़ों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।
एमवायएच अस्पताल के आर्थराइटिस विभाग की ओपीडी में जनवरी से अब तक लगभग 3500 मरीज पहुंचे हैं। इनमें से कई को फिजियोथेरेपी के लिए भी भेजा जा रहा है। कई लोगों को दर्द और चलने-फिरने से जुड़ी समस्याएं थी, जांच कराई तो आर्थराइटिस का पता चला। बता दें कि अर्थराइटिस के कई प्रकार हैं, लेकिन ऑस्टियो अर्थराइटिस और रूमेटाइड आर्थराइटिस प्रमुख हैं। ऑस्टियो आर्थराइटिस में जोड़ों के कार्टिलेज में घिसाव के कारण दर्द और चलने फिरने में परेशानी हो सकती है। रूमेटाइड आर्थराइटिस ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से जोड़ों पर हमला करती है, जिससे सूजन, दर्द और जकड़न हो सकती है।
केस-1: 26 साल के युवा के पैर के अंगूठे में सूजन थी। इसे वह सामान्य समझकर उपचार लेता रहा। बाद में पैर की अंगुलियों तक दर्द पहुंचा व सुबह अकड़न होने लगी। जांच में अर्थराइटिस की समस्या सामने आई। डॉक्टर्स के अनुसार, शराब पीने से यह स्थिति ज्यादा बढ़ रही थी।
केस-2: 41 वर्ष की महिला सुबह एक हाथ में सूजन व दर्द से परेशान थी। घर के काम करने के दौरान दर्द व सूजन चली जाती थी। लगभग 6 माह बाद जांच में अर्थराइटिस का पता चला। उपचार के साथ उन्हें नियमित व्यायाम की सलाह दी गई।
बच्चों में घुटनों या अन्य जोड़ों में बार-बार दर्द, सूजन, सुबह उठने पर अकड़न अथवा लंगड़ाकर चलने जैसी समस्याओं को खेलकूद की थकान मानकर छोड़ना ठीक नहीं है। जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस जैसे रोग हो सकते हैं। एमवाय के फिजियोथेरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष गोयल व अरुण पाटीदार ने बताया कि एमवायएच की ओपीडी में आए मरीजों में से लगभग 100 मरीज हर माह थेरेपी के लिए पहुंचते हैं।
-शरीर का वजन नियंत्रित रखें, ताकि घुटनों और कूल्हे पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
-नियमित रूप से टहलने, साइकिल चलाने या तैराकी जैसी कम प्रभाव वाली गतिविधियों को अपनाएं।
-लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें।
-पर्याप्त कैल्शियम व विटामिन-डी के लिए चिकित्सकीय सलाह के अनुसार कदम उठाएं।
एमवायएच में हर माह 200 पेशेंट आर्थराइटिस के आते हैं। कई मरीजों को बीमारी का पता नहीं होता है। वे दर्द बंद या सूजन कम होने की गोलियां खाते रहते हैं। इससे बाद में तकलीफ बढ़ जाती है। ऐसे में मरीजों को लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी होता है। हालांकि हर दर्द आर्थराइटिस नहीं होता है। 40 से ज्यादा उम्र की महिलाओं में भी यह बीमारी दिखती है। 16 साल से कम उम्र के बच्चों के केस भी पहुंचते हैं।- डॉ. संजय दुबे, रूमेटोलॉजी विभाग, एमवायएच